टोंक में SC, ST कोर्ट ने हत्या के मामले में 3 हत्यारों को मंगलवार को आजीवन कारावास(उम्र कैद) की सजा सुनाई है। साथ ही अर्थ दंड से भी दंडित किया है। कोर्ट की जज आरती माहेश्वरी ने फैसले के दौरान ऑर्डर में एक कविता भी पढ़ीं। कहा- ‘रात की चुप्पी में टूटी सांसों की डोर,
खेतों का रखवाला हो गया सदा के लिए मौन।
सत्तर बरस का श्रम, माथे पर ईमान,
चार अजनबी आए, छीन लिए उसके प्राण।
दुपट्टे की गांठ में घुटती रही पुकार, लालच की आंधी में मर गया इंसानियत का विचार।
कानों की मुर्कियां बनी मौत का कारण, सोने की भूख ने कुचल दिया मानव धर्म।
न्याय की धरती पर प्रश्न आज खड़ा हुआ, क्या इतना सस्ता है किसी का जीवन।
कानून ने सुना यह अपराध, मौन नहीं रहा गया, लूट और हत्या का अपराधी, न्याय के तराजू पर तोला गया।
मन बोला-हे न्याय के प्रहरी, कठोर बनो आज, ऐसे अपराध पर न हो कोई भी लिहाज।
जो छीने जीवन, उसे जीवन भर कैद मिले, ताकि कानून कहे-अपराध का अंत यही हो’ जज ने फैसले की ऑर्डर कॉपी में कविता के माध्यम से मृतका की पीड़ा को बयां की। इसके बाद हत्यारों को जेल भेज दिया गया। इस केस में चार आरोपी थे, एक की केस विचाराधीन के दौरान मौत हो गई। बेटे ने दर्ज करवाई थी रिपोर्ट
विशिष्ट लोक अभियोजक श्री मेघराज जाट ने बताया- प्रकरण में परिवादी रामकेश ने 18 फरवरी 2016 को पुलिस थाना अलीगढ़ में एक रिपोर्ट दी थी। बताया था- फरियादी का पिता 17 फरवरी 2016 की कल शाम को हमारे खेत पर रखवाली करने गए थे। वह वहीं पर रात चारपाई पर सोते थे, जहां रात में अज्ञात व्यक्ति ने मेरे पिताजी के गले में रूमाल से गला घोंटकर उन्हें मार गया। हत्यारा उनके कानों में पहनी हुई सोने की मुर्की निकालकर ले गया। दूसरे दिन सुबह मेरे पिताजी घर नहीं आए तो मेरा छोटा भाई प्रेमराज ने वहां जाकर देखा, जहां मेरे पिताजी मृत अवस्था में चारपाई से नीचे पड़े थे। बाद में इसकी सूचना भाई ने मुझे दी। फिर फरियादी ने पुलिस को मोबाइल से सूचना दी है। बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और शव का पोस्टमॉर्टम करवाकर सौंप दिया। अलीगढ़ थाना पुलिस ने अज्ञात जने के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। फिर कोर्ट में चालान पेश किया। अभियोजन पक्ष ने अपने मामले को प्रमाणित करने के लिए कुल 17 गवाहों, 55 दस्तावेजों व 7 आर्टिकल्स को प्रस्तुत कर प्रदर्शित कराया गया। इस मामले में आज न्यायाधीश आरती माहेश्वरी ने दोनों पक्षों की बहस सुनकर जिंदा बचे तीनों आरोपी गिर्राज, हरजी और सरदार उर्फ कालू पुत्र हरनाथ निवासी चंदलाई को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। चौथे आरोपी श्रवण की केस के विचाराधीन होने के दौरान ही मौत हो गई थी। मामले में न्यायालय ने मृतक बद्रीलाल के पुत्र रामकेश को पीड़ित प्रतिकर स्कीम से उचित सहायता राशि दिलाए जाने की अनुशंसा भी की है।


