प्रदेश के 30 हजार से अधिक सरकारी प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले 31 लाख से ज्यादा बच्चों की पढ़ाई अगले शैक्षणिक सत्र में आंशिक रूप से प्रभावित हो सकती है। वजह है करीब 53 हजार प्राथमिक शिक्षकों की ड्यूटी राष्ट्रीय महत्व की जनगणना प्रक्रिया में लगाया जाना। जनगणना का पहला चरण मई से सितंबर 2026 तक और दूसरा चरण फरवरी 2027 से शुरू होगा। जनगणना निदेशालय ने बोर्ड और उच्च कक्षाओं की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए मुख्य रूप से प्राथमिक शिक्षकों को ही फील्ड वर्क में लगाने का फैसला किया है। प्रशासन का तर्क है कि मई तक वार्षिक परीक्षाएं खत्म हो जाती हैं। इसलिए मौजूदा सत्र पर असर नहीं पड़ेगा। हालांकि हकीकत यह है कि नए सत्र की शुरुआत में ही बड़ी संख्या में शिक्षक जनगणना कार्य में व्यस्त रहेंगे। इससे कक्षा पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों की बुनियादी पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्राथमिक स्तर पर निरंतर शिक्षक-छात्र संवाद जरूरी होता है। खासकर ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में, जहां पहले से संसाधनों की कमी है, वहां सीखने की गति धीमी पड़ सकती है। इसलिए सत्र शुरु होने के साथ ही प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों पर पालकों के साथ ही स्कूल प्रबंधन को भी वैकल्पिक व्यवस्था पर ध्यान देना होगा। जिससे बच्चों की पढ़ाई खराब न हो। पालकों की भूमिका इसलिए अहम?
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पालकों को बच्चों की पढ़ाई पर अतिरिक्त ध्यान देना होगा। घर पर नियमित अभ्यास, होमवर्क की निगरानी और बुनियादी विषयों – हिंदी, अंग्रेजी और गणित की पुनरावृत्ति बच्चों की सीखने की निरंतरता बनाए रखनी होगी। जरूरत पड़ने पर सामुदायिक अध्ययन समूह या ट्यूशन का सहारा भी लिया जा सकता है। ऐसी हो वैकल्पिक व्यवस्था?
शिक्षा विभाग स्तर पर यह संभावना भी देखी जा रही है कि जहां शिक्षक संख्या बेहद कम है, वहां क्लस्टर मॉडल, अतिथि शिक्षक या डिजिटल कंटेंट के जरिए पढ़ाई जारी रखी जाए। कुछ जिलों में पहले से चल रहे ‘रीडिंग कैंप’ और ‘लर्निंग एन्हांसमेंट’ कार्यक्रमों को भी मजबूत किया जा सकता है। स्कूलों के सामने ये चुनौतियां
कई स्कूलों में एक या दो शिक्षक ही पदस्थ हैं। उनके जनगणना में जाने से मल्टीग्रेड क्लास की स्थिति बन सकती है। {अतिथि शिक्षकों या अस्थायी व्यवस्था पर निर्भरता बढ़ सकती है। {शुरुआती महीनों में पाठ्यक्रम पूरा करने का दबाव बढ़ेगा। इसका असर वार्षिक परिणामों पर भी दिख सकता है। बोर्ड और बड़ी कक्षाओं के बच्चे नहीं होंगे प्रभावित
जनगणना शुरू होने के समय स्कूलों में परीक्षा खत्म हो चुकी होगी। इसलिए चालू सत्र में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। अगला सत्र आंशिक प्रभावित होगा। हमारी कोशिश है कि बोर्ड और बड़े क्लास के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित ना हो। इसलिए प्राइमरी टीचर्स की ड्यूटी जनगणना में लगाने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में राज्य शासन से चर्चा हो गई है। उन्होंने टीचर्स की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी है।
– कार्तिकेय गोयल, निदेशक जनगणना निदेशायलय, छत्तीसगढ़
10 हजार प्रर्यवेक्षक
जनगणना के लिए फरवरी से ट्रेनिंग शुरू हो रही है। पहले चरण में जनगणना निदेशालय छत्तीसगढ़ के दो नेशनल ट्रेनर 60 मास्टर ट्रेनर्स को ट्रेनिंग देंगे। 60 मास्टर ट्रेनर्स में से 13 जनगणना निदेशालय के अधिकारी होंगे जबकि 47 राज्य सरकार (एसटीएम, तहसीलदार) के। ये 60 मास्टर ट्रेनर 1100 फील्ड ट्रेनरों को ट्रेनिंग देंगे। ये सभी राज्य सरकार के आला अधिकारी होंगे। 1100 फील्ड ट्रेनर 53000 प्रगणकों (प्राइमरी टीचर्स) और 10000 पर्यवेक्षकों (सरकारी कर्मचारी) को ट्रेनिंग देंगे। प्रगणक मुख्य रूप से प्राइमरी टीचर्स ही होंगे। नवा रायपुर में जनगणना निदेशालय भारत सरकार के छत्तीसगढ़ इकाई में जनगणना की तैयारियां शुरू हो गई है। जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। चूंकि उनके पास मध्यप्रदेश का भी चार्ज है, इसलिए वे वहां भी अफसरों की बैठकें ले रहे हैं।


