पीबीएम जनाना हॉस्पिटल के ऑपरेशन थिएटर के टायलेट में लीकेज के कारण पोर्च में छत पर लगी फॉल्स सीलिंग गिर पड़ी। हादसे की आशंका को देखते हुए वहां से पूरी फॉल्स सीलिंग हटा दी गई है। अब छत से उखड़ा हुआ प्लास्टर और आरसीसी का लोहा साफ नजर आ रहा है। जनाना हॉस्पिटल में मंगलवार की रात फॉल्स सीलिंग गिर पड़ी थी, जिससे बड़ा हादसा टल गया। आम तौर पर वहां मरीज के परिजन सोते हैं। एहतियात के तौर पर बुधवार को पीडब्ल्यूडी ने पूरी फॉल्स सीलिंग हटवा दी। दरअसल यह चूने की फॉल्स सीलिंग है, जो 10 से 15 साल पुरानी है। इसके ऊपर जनाना के ऑपरेशन थिएटर का टायलेट बना हुआ है। पीबीएम और पीडब्ल्यूडी के दल ने बुधवार सुबह जायजा लिया तो टायलेट का ड्रेनेज चोक मिला। पानी फर्श पर फैल रहा था, जिसकी वजह से लीक होकर वह छत के जरिए फॉल्स सीलिंग पर गिर रहा था। बताया जा रहा है कि कई महीनों से टायलेट की यही स्थिति बनी हुई थी। किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। टायलेट के ड्रेनेज सिस्टम की नियमित सफाई नहीं होती, जिसकी वजह से पानी फर्श पर ही फैला रहता है। छतों और दीवारों में सीलन का यह बड़ा कारण बना हुआ है। ड्रेनेज सही किए बिना ही लगा दी फॉल्स सीलिंग : पीबीएम में सौंदर्यीकरण के नाम पर दो साल पहले लाखों रुपए फॉल्स सीलिंग पर खर्च कर दिए। छतों से पानी आने लगा तो अब फॉल्स सीलिंग हटानी पड़ रही है। मेडिसिन कैजुअल्टी की छत पर लगी पूरी फॉल्स सीलिंग हटा दी गई है। यहां भी ऊपर वार्ड का टायलेट है, जहां ड्रेनेज सिस्टम ब्लॉक पड़ा है। दरअसल फॉल्स सीलिंग लगाने से पहले पीबीएम प्रशासन और पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया। नियमित सफाई के अभाव में टायलेट ब्लॉक होने से अब समस्या बड़ी हो गई है। छतों पर पट्टियां क्षतिग्रस्त होने लगी हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है। एसएमएस हादसे से भी सीख नहीं ले रहे पीबीएम के अफसर जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल में छत का प्लास्टर गिरने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने फॉल्स सीलिंग नहीं लगाने के निर्देश जारी किए थे। इसके पीछे कारण यह था कि फॉल्स सीलिंग के कारण पट्टियों में आई दरार और सीलन नजर नहीं आती, जिससे कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है। पीबीएम हॉस्पिटल की बिल्डिंग करीब 85 साल पुरानी है। मानसून में इसकी छत पर पानी भरने से कई वार्डों की पट्टियों और दीवारों में सीलन आ जाती है। कहीं-कहीं पानी भी गिरता है। इसकी अनदेखी करते हुए कई वार्ड और गैलरी में सौंदर्यीकरण के नाम पर फॉल्स सीलिंग लगाकर लाखों रुपए खर्च किए गए हैं।


