डीग के कस्बा जनूथर सहित जीएसएस से जुड़े गांवों के सैकड़ों किसानों ने सोमवार को दिन में बिजली आपूर्ति की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। किसानों ने निगम कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्या रखी। किसानों का कहना था कि रात में बिजली मिलने से उन्हें कड़ाके की सर्दी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, रात के समय जंगली जानवरों और जहरीले कीटों के काटने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इस कड़ाके की सर्दी में कई किसान बीमार भी हो रहे हैं। किसानों ने बताया कि सरकार ने दिन में बिजली देने का वादा किया था, लेकिन वह इस पर खरी नहीं उतर पा रही है। उन्हें कभी रासायनिक उर्वरकों की किल्लत का सामना करना पड़ता है, तो वहीं रबी सीजन में पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है। जिन क्षेत्रों में दिन में बिजली आती भी है, वहां भी कटौती की जा रही है। किसानों ने यह भी तर्क दिया कि रात में पानी का सही उपयोग नहीं हो पाता है, जिससे पानी बेकार बहता है और भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन होता है। यह सरकार की ‘बूंद-बूंद सिंचाई’ की बात के विपरीत है। प्रदर्शन की सूचना मिलने पर दोपहर 12 बजे कनिष्ठ अभियंता भूपेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोड की समस्या का हवाला देते हुए सभी फीडरों में दिन में बिजली आपूर्ति न कर पाने की बात कही। इस पर किसान भड़क गए और दिन में बिजली आपूर्ति की मांग पर अड़े रहे। कई घंटों की बातचीत के बाद किसानों और निगम के बीच सहमति बनी। इसके तहत, कुछ फीडरों में दिन में बिजली की आपूर्ति को सात दिन के बजाय 14 दिन तक किए जाने पर किसान आंशिक रूप से सहमत हुए और उन्होंने प्रदर्शन समाप्त करने का निर्णय लिया।


