विप्र समाज के नेतृत्व में सोमवार को 14 बटुकों का उपनयन संस्कार हुआ। विधिवत मंत्रोच्चार के साथ विद्वान आचार्यों ने सभी बटुकों को जनेऊ संस्कार में निभाए जाने वाले नियमों का सही ढंग से पालन करने का संकल्प दिलाया। बटुकों का मुंडन करवा कर, जनेऊ धारण करवाया गया। प्रत्येक बटुक ने हवन में आहुति देकर सनातन धर्म की परंपरा का निर्वाह किया। शाम 4 बजे गाजे- बाजे के साथ सभी बटुकों की बारात निकाली गई। हाथ में लाठी और भिक्षा पात्र थामकर बटुकों ने अपने रिश्तेदारों से भिक्षा मांगने की रस्म भी निभाई। यह नजारा नए विप्र भवन कवर्धा में आयोजित उपनयन संस्कार कार्यक्रम में दिखाई दिया। दो दिवसीय समारोह के पहले दिन रविवार 6 अप्रैल को बटुकों को तेल, हल्दी लगाने और विधिवत देवी- देवताओं का आह्वान करके प्रतिष्ठापित करने की रस्म निभाई गई थी। जीवन के नए महत्वपूर्ण नियम का पालन करने के लिए अग्रसर हो गए दूसरे दिन व्रतबंध (जनेऊ) संस्कार कार्यक्रम में श्रद्धा-भक्ति का माहौल छाया रहा। परिजनों ने बटुकों को जीवन के एक महत्वपूर्ण नियम का पालन करने की ओर अग्रसर होने पर आशीर्वाद दिया। दंडी स्वामी श्रीमज् ज्योतिर्मयानंद सरस्वती कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। अध्यक्षता सांसद संतोष पांडेय ने की। पंडरिया विधायक भावना बोहरा, रश्मि विजय शर्मा और रेखा संतोष पांडेय विशिष्ट अतिथि रहीं। शिक्षा शोभायात्रा निकली, नवदीक्षित बाल ब्राह्मण, उनके परिजन रहे मौजूद सोमवार शाम 4 बजे मां महामाया मंदिर से बटुक शिक्षा शोभायात्रा निकली। इसमें नवदीक्षित बाल ब्राह्मण, उनके परिजन और समाजजन शामिल हुए। इस अवसर पर 14 बटुकों का उपनयन संस्कार हुआ। विश्वनाथ तिवारी, साकेत शुक्ल, तुषार तिवारी, हर्ष दुबे, नामिस पांडेय, नैतिक पांडेय, विजय दुबे, विजय दुबे, सानिध्य तिवारी, मानस दुबे, प्रिंस मिश्रा, अनमोल उपाध्याय, विवान मिश्रा और राहुल तिवारी शामिल रहे। आचार्यों ने पूरा कराया व्रतबंध संस्कार विप्र समाज के लोग इसके साक्षी बने व्रतबंध संस्कार आचार्य पं. हरिप्रसाद शुक्ल, आचार्य पं. ओंकार प्रसाद दुबे और आचार्य पं. रामप्रसाद दुबे ने संपन्न कराया। आयोजन को सफल बनाने में विप्र समाज के वरिष्ठ सदस्य टीआर तिवारी, अध्यक्ष बंटी मनीष तिवारी, सचिव सुरेश शर्मा, उपाध्यक्ष वेद नारायण तिवारी, उपाध्यक्ष उमंग पांडेय, कोषाध्यक्ष सिद्धु तिवारी, आयोजन समिति अध्यक्ष विनोद तिवारी, युवा अध्यक्ष डॉ. आनंद मिश्रा, प्रमोद शुक्ला का योगदान रहा।


