रांची के विभिन्न स्कूलों में नर्सरी क्लास में बच्चों के नामांकन की प्रक्रिया चल रही है। फॉर्म भरने में जन्म प्रमाण पत्र जरूरी है। जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए रोजाना सैकड़ों लोगों की कतार नगर निगम में लग रही है। दूसरी ओर जन्म प्रमाण पत्र के ऐसे आवेदन जिसमें कार्यपालक दंडाधिकारी के यहां दो पड़ोसियों की गवाही जरूरी है, उसके लिए लोग नहीं पहुंच रहे हैं। कार्यपालक दंडाधिकारी के यहां 350 आवेदक गवाही कराने नहीं आए। एक बार सार्वजनिक नोटिस भी जारी किया गया, फिर भी आवेदकों ने रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद कार्यपालक दंडाधिकारी के यहां छह माह से पेंडिंग जन्म प्रमाण पत्र के 350 आवेदन रद कर दिए गए। मालूम हो कि एक वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों का जन्म प्रमाणपत्र बनाने के लिए अस्पताल का मूल प्रमाण पत्र और घर में जन्म लेने वाले बच्चों के मामले में दो पड़ोसियों की गवाही कार्यपालक दंडाधिकारी के यहां कराना जरूरी है। ऐसे आवेदन निगम में जमा होने के बाद कार्यपालक दंडाधिकारी के यहां भेज दिया जाता है। वहां आवेदकों को जाकर गवाही देनी पड़ती है। जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए आने वाले वैसे आवेदन जिसमें गवाही कराने की जरूरत है, उसमें बच्चे का जन्म घर में दिखाया जाता है। घर में जन्म दिखाने पर स्थानीय आंगनबाड़ी सेविका से सत्यापन रिपोर्ट लेनी पड़ती है। केस -2 : गवाह लेकर निगम का चक्कर लगाता रहा, पर बेटे का जन्म प्रमाणपत्र नहीं बन सका रंजीत सोनी ने कहा- बेटे का जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए अक्टूबर में आवेदन किया था। निगम में बताया गया कि गवाही के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। गवाही का फॉर्म भरा, पर जब गवाह लेकर गया तो बताया गया कि अभी गवाही नहीं हो रही है। उसके बाद तीन बार कार्यालय गया लेकिन चुनाव की वजह से कोई काम नहीं हो रहा था। जिस स्कूल का फॉर्म भरना था उसका समय समाप्त हो गया। इसलिए दोबारा गवाही कराने नहीं गए। केस -1 : विस चुनाव के कारण गवाही नहीं हुई, इसी बीच फॉर्म भरने का समय भी समाप्त हो गया शबा परवीन ने कहा- सितंबर में बेटी का जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए आवेदन दी थी। निगम ने गवाही के लिए कार्यपालक दंडाधिकारी के पास भेजा। इस दौरान वहां जाने के बाद काम नहीं हुआ। इसके बाद चुनाव के समय कई बार कार्यालय आने के बाद बताया गया कि अभी पदाधिकारी चुनाव ड्यूटी में लगे हुए हैं। इस दौरान स्कूल में फॉर्म भरने का समय समाप्त हो गया। इसलिए दुबारा कार्यालय नहीं गई। अब अगले साल ही नामांकन होगा।


