जबलपुर की महारानी महाकाली का विसर्जन आज:18 घंटे की यात्रा के बाद भिटौली कुंड में होगा विसर्जन

महाकाली विकास युवा संस्था द्वारा आयोजित बड़ी महाकाली पड़ाव और मां महाकाली कछपुरा की मूर्तियों का विसर्जन किया जाएगा। यह कार्यक्रम शाम 5 बजे प्रतिमा स्थल से प्रारंभ होगा। यह ऐतिहासिक विसर्जन यात्रा अपनी भव्यता और भक्तों की अटूट श्रद्धा के कारण पूरे देश में जानी जाती है। चमत्कार और आस्था का 70 साल पुराना इतिहास सन 1955 में स्थापित, यह महाकाली प्रतिमा पिछले 70 वर्षों से लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रही है। समिति के अध्यक्ष एवं आयोजक, एडवोकेट अखिल राज के अनुसार, समिति अपने विधान के तहत 13 दिन के लिए प्रतिमा की स्थापना करती है। इस वर्ष भी, जुलूस के दौरान भक्तों की श्रद्धा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विसर्जन स्थल भिटौली कुंड, गौरीघाट तक पहुंचने में करीब 18 घंटे का समय लगेगा। प्रतिमा का विसर्जन अगले दिन, 06 अक्टूबर सुबह 7-8 बजे हो पाएगा। डग-डग पर पूजन, देश भर के भक्तों की उपस्थिति छोटी लाईन फाटक से गौरीघाट तक जुलूस मार्ग पर करीब एक लाख लोग डग-डग पर माता का पूजन-अर्चन करेंगे। लाखों की संख्या में नारियल भेंट किए जाते हैं, और श्रद्धालु स्वयं जुलूस मार्ग की सफाई और धुलाई करते हैं। महारानी के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा केवल जबलपुर तक सीमित नहीं है। शिर्डी सांई सेवा संस्थान हर साल गुलाब की माला भेजता है, नागपुर से मखाने की माला आती है, और जयपुर व गुजरात के श्रद्धालु विशेष रूप से चुनरी चढ़ाने और जुलूस में शामिल होने आते हैं। चमत्कारी नींबू और भभूत की होड़ विसर्जन जुलूस में गोरखपुर से गौरीघाट के बीच कम से कम एक लाख लोगों का सैलाब दर्शन-पूजन के लिए उमड़ता है। इस दौरान, माता का नींबू और भभूत पाने की होड़ लगी रहती है। पंडा द्वारा भक्तों को दिया जाने वाला यह नींबू चमत्कारी माना जाता है, जिससे भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 18 घंटे की यह यात्रा सिर्फ एक विसर्जन जुलूस नहीं, बल्कि जबलपुर की महाकाली महारानी की शक्ति और लाखों भक्तों के विश्वास का महापर्व है।

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