जबलपुर-दमोह मार्ग (NH-34) को टू-लेन से फोरलेन किए जाने के विरोध में बोरिया बस्ती के सैकड़ों लोग शुक्रवार को सड़कों पर उतर आए। करणी सेना कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय नागरिक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन किया। उन्होंने बस्ती को बचाने की मांग की। करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष अनुराग प्रताप राघव ने NHAI को 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि इस अवधि में प्रभावितों के हितों की रक्षा को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर प्रशासनिक दफ्तरों तक आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दुख की बात है कि क्षेत्रीय विधायक और स्थानीय मंत्री ग्रामीणों के समर्थन में खड़े नहीं हुए। जब गरीबों की लड़ाई के लिए कोई आगे नहीं आया तो करणी सेना ने मोर्चा संभाला है। राघव ने कहा कि एक तरफ तो जानवरों के लिए कॉरिडोर बनाया जा रहा है तो दूसरी ओर विकास के नाम पर इंसानों को बेघर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि NHAI ने आश्वाशन दिया है कि 15 से 20 दिन में कोई दूसरा विकल्प निकाला जा रहा है। अगर ग्रामीणों के हित में काम होता है तो स्वागत है नहीं तो फिर करणी सेना के काम करने के तरीके से सभी अच्छे से जानते हैं। 50 से अधिक घर तोड़ने पड़ेंगे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि NH-34 को फोरलेन बनाने के लिए NHAI जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई कर रही है। बोरिया बस्ती के 50 से ज्यादा घर इसकी जद में आ रहे हैं। इससे 150 से अधिक नागरिकों के बेघर होने का खतरा पैदा हो गया है। जमीन अधिग्रहण में भेदभाव के आरोप स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। प्रभावितों का कहना है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें उजाड़ा जा रहा है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। महिलाओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि वर्षों से बसे परिवारों को हटाने से पहले प्रशासन को पुनर्वास और वैकल्पिक इंतजामों की ठोस योजना सामने रखनी चाहिए। NHAI से वैकल्पिक व्यवस्था की मांग NHAI का आश्वासन-पहले बात करेंगे प्रदर्शन के दौरान NHAI अधिकारियों ने प्रभावित लोगों को आश्वासन दिया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगाई जाएगी और प्रभावितों के साथ चर्चा कर परियोजना के वैकल्पिक विकल्पों पर काम किया जाएगा। रोड के सेंटर से दोनों तरफ बराबर अधिग्रहण हो बोरिया गांव के सतीश पटेल का कहना है कि हम पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं और अब हम बेघर किया जा रहा है। अभी 70 फीट की रोड है, जिसे 150 फीट किया जा रहा है। रोड एक तरफ चौड़ी की जा रही है, जिसकी जद में 70 मकान आ रहे हैं। भिलौदा, मुरई भी ऐसा ही किया जा रहा है। रोड के सेंटर से दोनों तरफ बराबर भूमि अधिग्रहण की जानी चाहिए। जहां पर अधिक घनी बस्ती है, वहां पर डेढ़ सौ फीट से घटकर 120 फीट की रोड बनाई जाए। मुआवजा के साथ घर बनाने के लिए जमीन भी मिलना चाहिए। सुनीता बर्मन का कहना है कि अगर उनका घर टूटता है तो वह पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगे, क्योंकि उनके परिवार में बुजुर्ग ही बचे हैं। उन्होंने कहा कि रोड को लेकर हमें आपत्ति नहीं है लेकिन सरकार को यह भी देखना चाहिए कि किसी को बेघर ना करें। गांव में बायपास का प्रोविजन नहीं NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत लाल साहू का कहना है कि फोरलेन के लिए 150 फीट भूमि अधिग्रहण का नियम है। बोरिया और उसके आसपास के गांव में बायपास का प्रोविजन नहीं है। इस कारण मुख्य मार्ग को चौड़ा किया जा रहा है। यहां फ्लाईओवर भी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता की मांग पर विचार किया जाएगा, जो ऑब्शन ठीक होगा उस पर काम किया जाएगा।


