जबलपुर नगर निगम के एक राजस्व अधिकारी पर गंभीर भ्रष्टाचार और घोटाले के आरोप सामने आए हैं, जिनसे निगम को करोड़ों रुपए का राजस्व नुकसान हुआ है। अधिकारी से जुड़े दो ऐसे मामलों के दस्तावेजी सबूत सामने आए हैं, जो न केवल चौंकाने वाले हैं बल्कि निगम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने इन दोनों मामलों की गहराई से जांच की, संबंधित स्थानों पर जाकर तथ्यों की पुष्टि की और दस्तावेज जुटाए हैं। ये मामले स्पष्ट संकेत देते हैं कि निगम में लंबे समय से अनियमितताएं और घोटाले चल रहे हैं। हालांकि इस अधिकारी के खिलाफ पहले से ही 7 से अधिक मामलों की जांच चल रही है। जांच में सामने आया है कि उसकी अनियमित कार्यशैली के चलते नगर निगम को लगातार टैक्स का बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 6 साल पहले बना मकान, शनिवार रात 12.25 पर लिस्ट किया जबलपुर के महाराणा प्रताप वार्ड में एक मकान है। कागजों में उसके मालिक शंकरलाल पिता सुकड़ काछी हैं। मकान का नंबर 1597 है। मकान का पुराना पहचान नंबर 44901560 है। जबकि नया पहचान नंबर 1000498736 है। पहले 888 वर्गफुट में पक्का और 600 वर्गफुट में कच्चा मकान निर्मित रिकॉर्ड था। इसकी जगह पर 1692 वर्गफुट में ग्राउंड फ्लोर और 859 वर्गफुट फर्स्ट फ्लोर पिछले 5-6 सालों से बना हुआ है। लेकिन नगरनिगम के रेवेन्यू इंस्पेक्टर ने इस मकान को साल 2025-26 में पोर्टल पर दर्ज किया। इससे नगर निगम को हजारों रुपए का टैक्स का नुकसान हुआ। मामला सिर्फ 6 साल लेट मकान की लिस्टिंग का नहीं है। जिस समय ये लिस्टिंग की गई ये बेहद संदेहास्पद है। इस मकान की लिस्टिंग रेवेन्यू इंस्पेक्टर सौरभ बिरहा द्वारा अचानक आधी रात को शनिवार-रविवार 11 और 12 अक्टूबर 2025 की रात 12.25 बजे लिस्ट किया गया। जिस आईडी से लिस्ट किया गया वो आईडी संभाग अधिकारी की थी। दैनिक भास्कर की टीम ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर मकान की स्थिति देखी। ये मकान वाकई 5-6 साल पुराना है। मकान मालिक शंकर लाल के पड़ोसियों से बात करने के बाद भी यही पुष्टि हुई कि ये मकान 5 साल से ज्यादा पुराना है। रेवेन्यू इंस्पेक्टर द्वारा ये कार्रवाई अचानक क्यों की गई। इसकी वजह पता लगाई तो पता चला कि पिता शंकर लाल की मौत होने के बाद उनके चार बेटों ने साल 2025 में नामांतरण के लिए आवेदन किया। अपने अपने हिस्से का मकान चाहा। आवेदन रेवेन्यू इंस्पेक्टर के पास पहुंचे तो इसने मकान की लिस्टिंग की ताकि चारों भाइयों के बंटवारा हो सके। क्योंकि अगर मौजूदा मकान लिस्ट ही नहीं होगा तो उसका बंटवारा कैसे होगा? 5-6 साल बाद की गई इस लिस्टिंग के नगर निगम को करीब 26 हजार रुपए की राजस्व हानि हुई है। यह एक मामला है। लेकिन इस तरह के 7 से ज्यादा मामलों पर जांच चल रही है जो पकड़ में आए हैं। लिस्टिंग घोटाला सामने आने पर जांच टीम गठित प्रॉपर्टी लिस्ट होने के बाद ऑनलाइन अप्रूवल के लिए अपर आयुक्त के पास जाती है। उस समय राजस्व विभाग में अपर आयुक्त अंजू सिंह ठाकुर थीं। हमारी पड़ताल में सामने आया कि 6 नवंबर 2025 को अंजू सिंह ठाकुर ने रेवेन्यू इंस्पेक्टर को 24 घंटे में जवाब देने का नोटिस जारी किया। उन्हें इस गड़बड़ घोटाले की जानकारी तब लग गई थी जब प्रॉपर्टी अप्रूवल के लिए उनके पास आई। साथ ही उन्हें उसकी लिस्टिंग का समय संदेहास्पद दिखा। सबसे बड़ा संदेह तब पैदा हुआ जब ये काम छुट्टी के दिन किया गया। इससे पहले अंकिता ठाकुर ने रेवेन्यू इंस्पेक्टर सौरभ बिरहा पर 17 पिन नंबरों पर हेर फेर की पुरानी शिकायतों पर 8 अगस्त को ही एक जांच कमेटी बना दी थी। जिसमें अध्यक्ष अनिका जैन (तत्कालीन संभागीय अधिकारी) और ऋषी कुसरे (रेवेन्यू इंस्पेक्टर) किशोर दहिया (रेवेन्यू इंस्पेक्टर) कमेटी के सदस्य बने। एक हफ्ते में जांच होनी थी। इस मामले में जांच कमेटी रेवेन्यू इंस्पेक्टर के जवाबों से संतुष्ट नहीं हुई तब तक ये नया मामला सामने आ गया। छुट्टी के दिन आधी रात को मकान लिस्टिंग मामले में अंजू सिंह ने सौरभ बिरहा से जवाब मांगा। पहले नोटिस पर सौरभ ने कोई जवाब नहीं दिया दूसरे नोटिस पर सौरभ ने गोलमोल जवाब दिया। सौरभ के पास अचानक ये काम करने का कोई आवेदन या सबूत मौजूद नहीं था। 6 नवंबर 2025 को तीसरा नोटिस जारी किया। जब ये नई घटना सामने आई, अपर आयुक्त ने RI को पहला नोटिस जारी किया। इसी बीच उनका विभाग बदल दिया गया। उन्हें राजस्व से जनसुनवाई और होर्डिंग्स वाले विभाग में शिफ्ट कर दिया गया। नए अपर आयुक्त IAS अरविंद शाह बने। देर रात बदलाव पर संदेह दैनिक भास्कर ने इस पूरे मामले में अंजू ठाकुर से बात की। अपर आयुक्त ठाकुर ने कहा, हम हर महीने प्रॉपर्टी में जो भी चेंज होते हैं उनकी सूची निकलते हैं। उस सूची में ये चीज सामने आई थी कि सौरभ ने रात 12 बजकर 25 मिनट 45 सेकेंड में कुछ प्रकार के संशोधन किए गए थे। ये चेंज शंकर काछी की प्रॉपर्टी में किए गए थे। ये नियम संबद्ध नहीं था। ये मामला पकड़ में आने के बाद हमने सौरभ को 3 नोटिस भी जारी किए थे, जिनमें से एक में ही जवाब आया। वो जवाब संतुष्टिजनक नहीं था। उनका जवाब था कि उन्होंने जो भी किया नगर निगम के हित में किया गया। फिर हमने इसको लेकर क्वेरी की थी लेकिन कोई जवाब नहीं आया। सच्चाई जानने दैनिक भास्कर की टीम मौके पर पहुंची। साथ ही वो डॉक्यूमेंट निकला जिसमें सौरभ बिरहा ने बने हुए मकान पर प्लॉट की जियो टैगिंग कर दी। मौके पर पहुंचने पर पता चला अरुण विश्वकर्मा पिता राजनारायण विश्वकर्मा, पिंकी पति अरुण विश्वकर्मा जिनकी संपत्ति पहचान संख्या 9000090137 है। खसरा नंबर 128/2/2 है। प्लॉट नंबर 179 है। इसमें 1250 स्क्वायर फुट जमीन पर टैक्स लगाया गया है। जबकि उस जगह पर 1250 वर्गफुट में मकान बना हुआ है। दैनिक भास्कर की टीम ने अरुण विश्वकर्मा की मां से प्रॉपर्टी डीलर बनाकर बात की। उनसे पूछा कि ये मकान किसका है? तो उन्होंने अपने बेटे अरुण का नाम बताया। साथ ही ये भी बताया कि यहां उनका मकान डेढ़ साल से बना हुआ है। वो यहीं रह रहे हैं। नए अपर आयुक्त ने, नई जांच कमेटी बनाई तीन महीने तक इस मामले में कुछ नहीं हुआ। एक एडवोकेट ने इस मामले को लेकर एक आरटीआई लगाई। नए अपर आयुक्त अरविंद शाह ने नई जांच टीम गठित कर दी। ये टीम 4 दिसंबर 2028 को गठित की गई थी। राजस्व अधिकारी आनंद मिश्रा और मयंक चौरसिया इसमें जांच अधिकारी बने। कमेटी को एक हफ्ते में मामले की तह तक पहुंचना था। तीन हफ्ते बीत चुके, जांच नहीं हो पाई अपर आयुक्त अरविंद शाह को इस बात की जानकारी ही नहीं है कि RI सौरभ ने 29 अक्टूबर 2025 को मकान की जगह प्लॉट की जियो टैगिंग की है। इसे अरविंद शाह ने अप्रूव भी किया है। उन्होंने ऑन कैमरा जांच कमेटी के आनंद मिश्रा से बात करने के लिए कहा खुद सामने नहीं आए। जांच में अब तक नोटशीट ही मंगाई गई हैं। 8- 10 नोटशीट हैं, सारी नोटशीट नहीं आई हैं। उसके बाद ही जांच आगे बढ़ेगी। सौरभ की दूसरी जगह ड्यूटी लगी थी, शायद इस वजह से थोड़ा टाइम लगा। मामला ये है कि RI के खिलाफ बहुत शिकायतें आई हैं। कई प्रॉपर्टी में ऐसा आया कि उन्होंने पूर्व दिनांक को छोड़ कर आज के दिनांक पर दर्ज कर दिया है। नामांतरण गलत प्रक्रिया से किया है। शिकायतें बहुत सारी हैं। उन सभी में अलग अलग जांच की जाएगी। 6 साल बाद मकान की लिस्टिंग वाले मामले में भी मौके पर पहुंचकर जांच की जाएगी। हमारी जांच में कुछ समय लग सकता है क्योंकि हमारी दो तीन जगह ड्यूटी लगाई गई है। SIR में भी हमारी ड्यूटी लगी है। कोशिश रहेगी कि 10 से 15 दिन में जांच पूरी कर लें।


