भारत भवन में 9 जनवरी 2026, शुक्रवार से भोपाल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल 2026 का आगाज होगा। तीन दिन तक चलने वाले इस आयोजन के पहले दिन साहित्य, इतिहास, तकनीक, शासन व्यवस्था और भारतीय सैन्य इतिहास जैसे विषयों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए जाएंगे। देश के प्रमुख लेखक, विचारक और विशेषज्ञ अलग-अलग मंचों पर संवाद करेंगे। फेस्टिवल के पहले दिन सुबह 11:00 बजे उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा। उद्घाटन में गणेश वंदना और सरस्वती वंदना प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद साहित्यिक और वैचारिक सत्रों की शुरुआत होगी। तकनीक और भविष्य पर पहले सत्र सुबह 11:00 से 11:50 बजे पहले अकादमिक सत्र ‘द नेक्स्ट न्यू: द फिफ्थ इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन’ में लेखक प्रांजल शर्मा और अनिरबन सरमा भविष्य की औद्योगिक क्रांति, तकनीकी बदलाव और उसके सामाजिक प्रभावों पर चर्चा करेंगे। इसी समय ‘एल्गोरिदमिक गवर्नेंस’ सत्र में डिजिटल प्रशासन, तकनीक और नीति निर्माण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर संवाद होगा। सैन्य इतिहास पर विशेष सत्र सुबह 11:00 से 11:50 बजे एक अन्य सत्र ‘जनरल जोरावर सिंह: अनबीटन लायन ऑफ द हिमालयाज’ में भारतीय सैन्य इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय पर चर्चा होगी। यह सत्र हिमालयी क्षेत्र में भारत की सैन्य विरासत और रणनीतिक दृष्टि को सामने रखेगा। दोपहर में विदेश नीति और प्राचीन इतिहास पर चर्चा दोपहर 12:00 से 12:50 बजे ‘इंडियाज ट्रबल्ड ईस्टर्न नेबर्स’ सत्र में भारत के पूर्वी पड़ोसी देशों के साथ संबंधों, कूटनीतिक चुनौतियों और क्षेत्रीय राजनीति पर चर्चा होगी। इसी समय ‘ट्राइब्स इन एंशिएंट इंडिया’ सत्र में प्राचीन भारत में जनजातीय समाज की भूमिका, संस्कृति और योगदान पर संवाद किया जाएगा। महाभारत और पौराणिक कथा पर आधारित सत्र दोपहर 12:00 से 12:50 बजे ‘द इनक्रेडिबल स्टोरी ऑफ अभिमन्यु, सन ऑफ अर्जुन’ सत्र में महाभारत के पात्र अभिमन्यु की कथा, साहस और युद्ध कौशल पर साहित्यिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से चर्चा होगी। शाम 4:00 से 4:50 बजे लेखक अश्विन सांघी ‘द अयोध्या एलायंस एंड द 7000 ईयर ओल्ड सीक्रेट’ सत्र में अपने चर्चित उपन्यास और उससे जुड़े ऐतिहासिक संकेतों, मिथकों और कथाओं पर बातचीत करेंगे। यह सत्र पहले दिन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहेगा। कला और जनजातीय संस्कृति के आयोजन भी रहेंगे आकर्षण सुबह 11:00 से शाम 6:00 बजे तक पहले दिन आदिरंग ट्राइबल आर्ट कैंप, गोंड और बैगा कलाकारों की लाइव कला गतिविधियां और पद्मश्री दुर्गा बाई व्याम की आधुनिक कला प्रदर्शनी दर्शकों के लिए खुली रहेंगी। जनजातीय कला और दृश्य संस्कृति फेस्टिवल का अहम हिस्सा रहेंगी।


