जबलपुर में आदिवासियों को कागजों पर दोबारा मार दिया:पहले जिंदा बताकर कर्मकार कार्ड बनवाया, फिर फर्जी डेथ सर्टिफिकेट से लाखों हड़पे; अब रिकवरी निकली

जबलपुर जिले में मर चुके कुछ आदिवासियों को जिंदा बताकर उनकी कर्मकार आईडी बनवाई गई। इसके दो से तीन महीने बाद दोबारा सरकारी कागजों में उन्हें मार दिया गया। यह सब कर्मकार कार्ड पर मिलने वाली 2 लाख रुपए की सरकारी मदद के लिए किया गया। इस पूरे खेल में सरपंच, सचिव और अधिकारी शामिल हैं। अब रिकवरी निकाली जाएगी। हैरानी की बात ये है कि मृत आदिवासियों के परिवारों से दस्तावेज ले लिए गए, लेकिन उन्हें इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया गया। कुछ लोग काला कोट पहनकर आए, पति के कागज मांगे
पड़ताल के लिए दैनिक भास्कर की टीम कुंडम तहसील के जैतपुरी गांव पहुंची। यह आदिवासी बाहुल्य गांव है। ज्यादातर लोग पढ़ें-लिखे नहीं हैं। हमारी मुलाकात मुलिया बाई से हुई। 2020 में कोरोना काल में पति गुड्डा सिंह आदिवासी (38) की मौत हो गई थी। गुड्‌डा के नाम से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र ग्राम पंचायत जैतपुरी से 9 अगस्त 2022 को बना। इसे उप रजिस्ट्रार (जन्म एवं मृत्यु) ने जारी किया। डेथ सर्टिफिकेट से पहले 2 अप्रैल 2022 को मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल, भोपाल से कर्मकार कार्ड भी बन गया। फाइल कुंडम जनपद पहुंची। 2 लाख की सहायता राशि जारी हुई। स्टेट बैंक चौरई से यह रकम निकाल भी ली गई। हमने मुलिया से इस बारे में बात की। उन्होंने बताया, ‘पति की मौत के 2 साल बाद 2022 में कुछ लोग काला कोट पहनकर गांव आए थे। उन्होंने मुझसे कागज लिए। कुछ दिन बाद चौरई के बैंक ले गए। एक कागज पर अंगूठा लगवाने के बाद 40 हजार रुपए देकर वापस घर छोड़ गए थे। उन्होंने यह भी नहीं बताया था कि वे पैसे क्यों दे रहे हैं।’ हमने फिर पूछा कि कौन आया था? इसके जवाब में मुलिया कहती हैं, ‘पुराने सरपंच और कुछ लोग घर आए थे। बोले थे कि पति के कागज दे दो, कुछ पैसे दिलवा देंगे। उन्होंने बैंक ले जाकर फोटो उतरवाया और खाता भी खुलवाया। बैंक की किताब अभी उन्हीं लोगों के पास है।’ सरपंच-सचिव ने बनवाया कार्ड, अधिकारी ने पास किया पैसा
गुड्डा सिंह का फर्जी कर्मकार कार्ड जैतपुरी गांव के तत्कालीन सचिव बद्री प्रसाद कोल और सरपंच नरेंद्र सिंह मरावी ने तैयार कर समन्वय अधिकारी हीरालाल बरकड़े को दिया था। अधिकारी ने जांच कर 2 लाख 6 हजार रुपए की राशि पास कर दी थी। प्रभात और कोदूलाल का भी फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया
गुड्डा सिंह की तरह झिरमिला गांव में प्रभात कुमार और कोदूलाल का भी फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया गया। कर्मकार कार्ड बनाने के लिए कुंडम जनपद कार्यालय में अप्लाई किया गया। हालांकि, जांच में दोनों के ही आवेदन फर्जी पाए जाने पर फाइल निरस्त कर दी गई। कर्मकार कार्ड के 2 लाख में से 1 लाख रुपए की डिमांड
22 साल के प्रभात कुमार की मौत सड़क हादसे में 16 दिसंबर 2022 को हुई थी। प्रभात के परिवार ने बताया कि कुछ लोगों ने उसके पिता और चाचा से संपर्क कर कहा कि कर्मकार योजना के तहत दो लाख रुपए दिलवा देंगे। इसमें 1 लाख रुपए हमें देने होंगे। 8 मई 2023 को उसका दोबारा मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया। इसी तारीख के आधार पर कर्मकार कार्ड बनवाने के लिए आवेदन किया गया। फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाया गया। 19 जनवरी 2023 को कर्मकार कार्ड बन भी गया। समन्वय अधिकारी नरेश महोबिया ने जांच के बाद आवेदन निरस्त कर दिया। कम्प्यूटर ऑपरेटर ने कहा था- 1 लाख रुपए देने होंगे
झिरमिला गांव के कोदू लाल की मौत 2014 में हो गई थी। स्वास्थ्य खराब था। इनके नाम का भी कर्मकार कार्ड 2023 में बन गया। भतीजे प्रदीप कछवाहा ने बताया कि कुंडम जनपद में पदस्थ कम्प्यूटर ऑपरेटर छोटे लाल सोनी ने चाचा के कागज मांगे थे। यह भी कहा था कि दो लाख रुपए मिलना हैं, 1 लाख रुपए देने होंगे। चाचा की मां रम्मी बाई का बैंक खाता नंबर भी मांगा गया था। बता दें, यह आवेदन भी समन्वय अधिकारी महोबिया ने रद्द कर दिया था। कुंडम जनपद पंचायत के सीईओ पीएल यादव का कहना है- कुछ केस सामने आए हैं। रिकवरी करवाई जा रही है। समन्वय अधिकारी सहित सरपंच, सचिव को नोटिस जारी किया गया है। कर्मकार कार्ड स्वघोषणा पत्र के आधार पर बनते हैं। बाद में जनपद स्तर पर इसकी जांच की जाती है ये खबर भी पढ़ें- अफसर ने खुद निकाला अपने डिमोशन का आदेश घपला करने के लिए एक अधिकारी ने खुद की पोस्टिंग निचली पोस्ट पर कर ली। इसका ऑर्डर भी खुद ही निकाला। यह पूरा खेल इंदौर नगर निगम में हुए 150 करोड़ रुपए के ड्रेनेज घोटाले से जुड़ा है। करप्शन के इस केस में ऑडिट डिपार्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर अनिल गर्ग, समर सिंह परमार और रामेश्वर परमार के खिलाफ भी केस दर्ज है। पढ़ें पूरी खबर…

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