जबलपुर में सीबीआई ने सेंट्रल जीएसटी के असिस्टेंट कमिश्नर विवेक वर्मा और इंस्पेक्टर सचिन कांत खरे को आज (गुरुवार) सीबीआई कोर्ट में पेश किया। इस दौरान सीबीआई के वकील ने पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की। बुधवार रात सीबीआई की टीम ने ग्वारीघाट स्थित केंद्रीय जीएसटी कार्यालय में होटल कारोबारी विवेक त्रिपाठी की शिकायत पर छापामार कार्रवाई की थी। इस दौरान सुपरिटेंडेंट मुकेश बर्मन मौके से फरार हो गए, जबकि विवेक वर्मा और सचिन कांत खरे को सीबीआई ने चार लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान सीबीआई को पता चला कि इस पूरे रिश्वतखोरी मामले के सूत्रधार विवेक वर्मा ही थे। हालांकि, उन्हें इस बात की भनक लग चुकी थी कि सीबीआई की टीम पहुंच रही है, जिसके चलते वे कार्यालय से फरार हो गए। गुरुवार को जब सीबीआई ने विवेक वर्मा और सचिन कांत खरे को कोर्ट में पेश किया, तो दिव्यांग होने के कारण विवेक वर्मा को व्हीलचेयर देने की पेशकश की गई, लेकिन उन्होंने लेने से मना कर दिया। इसके बाद विवेक वर्मा बैसाखी के सहारे ही वाहन से कोर्ट तक पहुंचे। इससे पहले सीबीआई गुरुवार को नर्मदा नगर स्थित सचिन कांत और मुकेश बर्मन के घर पहुंची, संपत्ति संबंधित दस्तावेज मिले हैं। हालांकि सीबीआई को उनके घर से नकदी ज्यादा नहीं मिली है। इसके अलावा विवेक वर्मा के गुडविल अपार्टमेंट स्थित घर पर भी सीबीआई ने सर्चिंग की है। टीम को देखकर भागने लगा अफसर
बुधवार की रात जैसे ही विवेक त्रिपाठी के एम्पलाई को राइट टाउन के पास सचिन कांत खरे को रिश्वत के चार लाख दिए वैसे ही उसने पैसे लेने के बाद उसे अपनी टू व्हीलर की डिक्की में रखा और वहां से जाने लगा। इसी दौरान सीबीआई की टीम आ गई, जिन्हें देखकर वह फरार हो गया। सीबीआई उसका पीछा लगातार कर रही थी। जैसे ही उसे यह जानकारी लगी तो उसने गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी। इसके बाद सचिनकांत खरे राइट टाउन से मदन महल स्टेशन होते हुए छोटी लाइन, रामपुर और फिर ग्वारी घाट पहुंचा, जहां पर की सीबीआई ने घेराबंदी करते हुए उसे गिरफ्तार किया और मौके पर ही उसके हाथ धुलवाए। पकड़ाया तो असिस्टेंट कमिश्नर को लगवाया फोन
सीबीआई ने सचिन कांत को गिरफ्तार करने के बाद उसे विवेक वर्मा को कॉल करने कहा। जैसे ही विवेक वर्मा को कॉल करके सचिनकांत खरे ने कहा कि विवेक त्रिपाठी के चार लाख रुपए मिल गए हैं इस पर विवेक वर्मा ने कहा ठीक है पैसे अभी अपने पास रख लो। इसके बाद सीबीआई के कहने पर सचिन कांत खरे ने मुकेश बर्मन को भी फोन लगाया जिस पर की बताया गया की रिश्वत के पैसे 400000 रुपए मिल गए हैं।


