मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में करीब एक दर्जन से अधिक मेल टीचरों ने जनहित याचिका दायर की है। जिसमें कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने लिंगभेद करते हुए महिलाओं को 100 प्रतिशत आरक्षण दिया है, जो कि सही नहीं है। अदालत ने संबंधित विभाग को निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 5 जनवरी को तय की है। चूंकि 7 जनवरी को फार्म भरने की अंतिम तारीख है। लिहाजा सभी की नजरें आगामी 5 तारीख की सुनवाई पर लगी हुई है। 7 जनवरी को फॉर्म भरने की अंतिम तारीख
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में नर्सिंग क्षेत्र की योग्यता रखने वाले कई उम्मीदवारों ने कोर्ट को बताया है कि राज्य मध्यप्रदेश सरकार ने एसोसिएट प्रोफेसर, एसिस्टेंट प्रोफेसर और ट्यूटर की सीधी भर्ती में लिंगभेद करते हुए महिलाओं को 100 प्रतिशत आरक्षण दिया है, जो कि असंवैधानिक है। मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल के भर्ती विज्ञापन को हाईकोर्ट मे चुनौती दी गई है जिस पर हाईकोर्ट की प्रिंसिपल बेंच में अवकाश कालीन पीठ के जस्टिस अमित सेठ और जस्टिस हिमांशु जोशी ने सुनवाई करते हुए शासकीय अधिवक्ता को संबंधित विभाग से निर्देश लेकर अगली सुनवाई में पक्ष रखने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 5 जनवरी को नीयत की है। चूंकि 7 जनवरी को फॉर्म भरने की अंतिम तारीख है, लिहाजा सभी की नजरें अगामी सुनवाई पर लगी हुई है। 16 दिसंबर 2025 को जारी किया था विज्ञापन
दरअसल, मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल भोपाल ने 16 दिसंबर 2025 को विज्ञापन जारी किया, जिसमें कि मध्यप्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं शिक्षा चिकित्सा विभाग के अंतर्गत संचालित सरकारी नर्सिंग काॅलेजों में तीन पदों पर भर्ती निकाली जो कि असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और ट्यूटर के पद है। विभाग ने सभी 286 पद महिलाओं के लिए आरक्षित करते हुए सभी पुरुष उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया से अपात्र कर दिया है। राज्य सरकार के इस विज्ञापन को जबलपुर निवासी नौशाद अली ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिकाकर्ता के वकील अधिवक्ता विशाल बघेल ने बताया मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की ग्रुप-1 सब ग्रुप-2 संयुक्त भर्ती परीक्षा 2025 के विज्ञापन में असिस्टेंट प्रोफेसर तथा एसोसिएट प्रोफेसर सहित ट्यूटर के कुल 286 पदों पर महिला उम्मीदवारों को 100 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 सिस्टर ट्यूटर के पद भरे जाने हैं। संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 की अनदेखी
याचिका में बताया गया है कि सरकार के भर्ती नियम और इंडियन नेशनल काउंसिल के सभी मापदंड का उल्लंघन किया है। दलील दी गई है कि लोक स्वास्थ्य कल्याण विभाग द्वारा की जा रही भर्ती में संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 तथा भर्ती के नियमों की अनदेखी की जा रही है। याचिका में प्रमुख रूप से कहा गया है कि संविधान का अनुच्छेद 16(2) लोक नियोजन (सरकारी नौकरियों) के मामलों में सभी नागरिकों को अवसर की समानता की गारंटी देता है, जिसका अर्थ है कि धर्म, जाति, लिंग, वंश, जन्म स्थान या निवास के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा, लेकिन इसके विपरीत योग्य पुरुष उम्मीदवारों से लिंग के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
याचिका में कहा गया है कि सरकार की ये भर्ती प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले के 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का उल्लंघन किया है। मामले पर जस्टिस अमित सेठ और जस्टिस हिमांशु जोशी की अवकाश कालीन युगलपीठ ने सुनवाई करते हुए सरकार को अपना जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।


