जमशेदपुर में खरखाई नदी में डूबे तीन छात्र:दोस्त का बर्थडे मनाने पहुंचे थे बड़ौदा घाट, 1 को स्थानीय लोगों ने बचाया, 2 लापता

जमशेदपुर के बागबेड़ा थाना क्षेत्र स्थित बड़ौदा घाट के खरखाई नदी में नहाने के दौरान तीन दोस्त शनिवार की शाम डूब गए। इसमें से बड़ौदा घाट निवासी पार्थ कुमार को स्थानीय लोगों ने बचा लिया जबकि कदमा भाटिया बस्ती स्थित गौतम अपार्टमेंट के रहने वाले शशांक कुमार और मानगो कुंवर बस्ती के रहने वाले शुभम कुमार मेहता नदी में डूब गए। दोनों लापता हैं। राजस्थान सेवा सदन में पार्थ का चल रहा इलाज पार्थ कुमार को इलाज के लिए लोगों ने जुगसलाई स्थित राजस्थान सेवा सदन पहुंचा। यहां वह इलाजरत है। तीनों आरवीएस कॉलेज के बीटेक फाइनल ईयर के छात्र थे। शनिवार को पार्थ कुमार का जन्मदिन था। तीनों जन्मदिन मनाने बड़ौदा घाट पहुंचे थे। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। अंधेरा होने की वजह से लापता दो युवकों की तलाश शुरू नहीं हो पाई। आज पुलिस युवकों की तलाश के लिए गोताखोरों को नदी में उतारेगी। इधर स्थानीय लोगों ने नदी में डूबने का वीडियो भी बनाया है। बर्थडे मनाने की बात कह निकला था शशांक हादसे के शिकार शशांक कुमार की मां शारदा देवी ने घटनास्थल पहुंची। उन्होंने बताया कि दोस्त पार्थ का जन्मदिन मनाने की बात बोलकर बेटा दोपहर एक बजे घर से निकला था। दोपहर तीन बजे तक उससे बात भी थी। तब तक सब ठीक था। बेटे को तैरना नहीं आता था। शशांक की मां सिलाई का काम करती है जबकि पिता सुनील मिश्रा की तबीयत ठीक नहीं रहती है। शुभम और शशांक के डूबने की खबर से दोनों के परिजनों का रो-रो कर बूरा हाल है। गढ़वा का रहने वाला है शुभम पानी में लापता शुभम कुमार मेहता मूल रूप से गढ़वा जिले का रहने वाला है। मानगो स्थित कुंवर बस्ती में वह अपने चाचा बिजली विभाग में लाइनमैन राजेश कुमार के घर में रहकर बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। उसके पिता मिथिलेश मेहता गांव में ही रहते हैं। शुभम दो भाई बहनों में बड़ा है। उसके चाचा मौके पर पहुंचे बताया कि भतीजा सुबह ही घर से निकला था। पुलिस ने फोन कर घटना की जानकारी दी। लगातार हो रही हैं डूबने की घटनाएं शहर और आसपास के इलाके में नदी और डैम में डूबने की लगातार घटनाएं हो रही हैं। इस साल 6 महीने में 11 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद भी प्रशासन ने गोताखोर की व्यवस्था नहीं की है। राहत और बचाव कार्य ठीक से नहीं चल पाता है। यहां तक कि शवों को ढूंढने में भी लंबा इंतजार करना पड़ता है। जिला प्रशासन ने घटनाओं को देखते हुए एनडीआरएफ की टीम की स्थाई व्यवस्था की घोषणा की थी लेकिन अबतक इसको अमल में नहीं लाया गया है।

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