साहित्य और लोकतंत्र विषय पर व्याख्यान
शहर में शनिवार से दो दिवसीय जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल की शुरुआत हुई। विद्यादीप फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस महोत्सव में देशभर से साहित्यकारों, शिक्षाविदों, अभिनेताओं, चित्रकारों और लेखकों ने सहभागिता की। यह पहली बार है जब शहर में राष्ट्रीय स्तर के इतने बड़े साहित्य महोत्सव का आयोजन किया गया है। महोत्सव का उद्घाटन लेखक व पत्रकार सोपान जोशी, चित्रकार मनीष पुष्कले, दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन डॉ. रंजन कुमार त्रिपाठी, अभिनेता राजेश जैस, भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव (मंत्रिमंडल सचिवालय) आईएएस व लेखक सौरभ तिवारी, फिल्म निर्देशक अभिषेक चौबे और घाटशिला विधायक सोमेश सोरेन ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि भारतीयों को विकास की राह समझनी होगी। समझने और आगे बढ़ने की राह पुस्तकें और साहित्य ही दे सकते हैं। व्यक्ति, समाज से लेकर सत्ता तक में बदलाव केवल साहित्य ही ला सकता है। एेसे में हमें पुस्तकों की ताकत समझकर, सीखते हुए आगे बढ़ना होगा। किताबें पहले हमारे जीवन में बदलाव लाती हैं। यह बदलाव ही बेहतर समाज बनाता है। साहित्यकार लोकतंत्र में बिना चुनाव के चुने हुए रहनुमा होते हैं, जो सरकार और समाज को दिशा देते हैं। उन्होंने बताया कि जॉर्ज फर्नांडीस और चंद्रशेखर जैसे दिग्गज नेता जेल में बंद रहने के दौरान उत्साह देने वाले साहित्य पढ़ते थे। विपरीत दिनों में भी साहित्य जीवन के प्रति उत्साह और संघर्षशक्ति प्रदान करता है। पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे अखबार के लिए भी साहित्यकारों की समझ और लेखनी का इस्तेमाल करते थे। इसमें रामदयाल मुंडा समेत तमाम साहित्यकारों के लेख छापते थे। इससे पहले हरिवंश को शब्द शिल्पी सम्मान देते हुए एक लाख की राशि दी गई। इसे हरिवंश ने भारत सेवाश्रम को दान करने की बात कही। पद्मश्री विभूतियों को किया गया सम्मानित
शाम के सत्र में पद्मश्री लक्ष्मण सिंह, भज्जू श्याम, जमुना टुड्डू, दमयंती बेसरा, चामी मुर्मू, सुंडाराम वर्मा, डॉ. जानुम सिंह सोय, प्रेमलता अग्रवाल, शशधर आचार्य, दीपिका कुमारी और छुटनी देवी को सम्मानित किया गया। इससे पहले दोपहर में व्यापार और निवेश की समझ पर उद्यमी व लेखक बनवारी लाल मित्तल से संवाद हुआ। ‘बदलता भारत, बदलती मीडिया’ विषय पर पत्रकार डॉ. अंजुम शर्मा से चर्चा की गई। ‘साइलेंट सिनेमा से ओटीटी तक’ विषय पर अभिनेता राजेश जैस से संवाद आयोजित किया गया। साहित्यकारों को मिला सम्मान
फेस्टिवल के दौरान साहित्यकारों को ‘शब्द शिल्पी सम्मान’ दिया गया। डॉ. अंजुम शर्मा को एक लाख रु. का पुरस्कार दिया गया, जिसे उन्होंने दो बच्चों की शिक्षा के लिए दान कर दिया। वामेश शुक्ला और बाबुषा कोहली को भी एक-एक लाख का पुरस्कार मिला। डॉ. रविदत्त बाजपेई और प्रो. स्वाति पराशर को 50-50 हजार रुपए की राशि पुरस्कार स्वरूप दी गई। बीएल मित्तल, डॉ. मयंक मुरारी और अचल प्रियदर्शी को भी शब्द शिल्पी सम्मान से सम्मानित किया गया। जमशेदपुर में शब्दों के शिल्पी तैयार होते हैं : सौरभ तिवारी
आईएएस सौरभ तिवारी ने कहा कि जमशेदपुर केवल स्टील का शहर नहीं है, बल्कि यहां शब्दों के शिल्पी भी तैयार होते हैं। उन्होंने दो पंक्तियां सुनाईं ‘मैं चिराग नहीं जो हल्की हवा से बुझ जाऊं, मैं चिराग नहीं जो गिरकर अपना ही मकान जलाऊं। डॉ. रंजन कु त्रिपाठी ने कहा कि ऐसे आयोजन पूरे राष्ट्र से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने एक अन्य पंक्ति भी साझा की ‘मैं वह कलम नहीं हूं जो बिक जाते हैं।’


