जमीन के लिए जनी शिकार बनीं आदिवासी महिलाएं, एनएचआइ के खिलाफ प्रदर्शन

इस आंदोलन की अगुवाई कर रहीं भकुआ टोली की फुलमनी उरांव, चांडाली की सुरजमनी उरांव और घटगांव की बिरसो उरांव ने कहा कि जब-जब आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन पर संकट आया है, तब महिलाएं “जनी शिकार” की परंपरा निभाते हुए पुरुषों का वेश धारण कर मोर्चा संभालती रही हैं।उन्होंने कहा कि भारत माला सड़क योजना में भी वही स्थिति बन गई है, इसलिए महिलाओं को फिर से जनी शिकार बनना पड़ा। भास्कर न्यूज|गुमला भारत माला सड़क परियोजना के तहत प्रस्तावित 32 किलोमीटर सड़क चौड़ीकरण के विरोध में मंगलवार को आदिवासी का उग्र दृश्य देखा गया, जिसने प्रशासन और निर्माण एजेंसी दोनों को हिला कर रख दिया। 15 गांवों की हजारों आदिवासी महिलाएं और पुरुष, पारंपरिक पुरुष वेश-भूषा धारण कर, हाथों में लाठी, डंडा, तीर-धनुष लेकर सड़क पर उतर आए। यह प्रदर्शन केवल विरोध नहीं, बल्कि जल-जंगल-जमीन बचाने का ऐलान था। आक्रोशित ग्रामीणों ने भारत माला सड़क योजना का कार्य कर रही शिवालया कंस्ट्रक्शन कंपनी के सारु गांव स्थित प्लांट पर धावा बोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने वहां खड़े हाइवा, जेसीबी मशीनों और कार्यालय कक्षों में जमकर तोड़फोड़ की। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। महिलाओं के तेवर इतने उग्र थे कि पूरा इलाका रणभूमि में तब्दील नजर आया।ग्रामीणों का आरोप है कि एनएचआई विभाग सड़क चौड़ीकरण के नाम पर उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण कर रहा है। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने साफ कहा कि उनकी पूरी आजीविका खेती पर निर्भर है।

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