जयपुर पहुंचा दुर्लभ पक्षी, मांझे की चपेट में आया:5 हजार किलोमीटर का सफर कर पहुंचा है सांभर, पहली बार बड़े झुंड में आया

सांभर में हो रहा काइट फेस्टिवल यहां आने वाले दुर्लभ प्रवासी पक्षियों के लिए जानलेवा हो गया है। इस साल यहां दुर्लभ प्रजाति ग्रेट व्हाइट पेलिकन का एक बड़ा झुंड देखा गया है। जिसमें से एक पक्षी पंतगबाजी के दौरान घायल हो गया। ग्रेट व्हाइट पेलिकन पक्षी इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की रेड लिस्ट में लुप्त प्रजातियों में शामिल है। पक्षी साइंटिस्ट आशा शर्मा ने बताया- पहली बार इस प्रजाति के इतने पक्षी सांभर झील में देखे गए हैं। झील के किनारे हो रही गतिविधियां और काइट फेस्टिवल इनकी सुरक्षा के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। प्राकृतिक आवास की कमी और संरक्षण की जरूरत पक्षी विज्ञानी आशा शर्मा ने कहा- ग्रेट व्हाइट पेलिकन जैसे दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी प्राकृतिक आवास की कमी के कारण तेजी से लुप्त हो रहे हैं। 5 हजार किलोमीटर का सफर तय करके सांभर पहुंचते हैं। हर साल कुछ की संख्या में आते हैं। इस बार झुंड के रूप में डेरा डाले हुए हैं। आमतौर पर सांभर झील में ग्रेट व्हाइट पेलिकन का पैसेज माइग्रेशन ही रिकॉर्ड किया जाता है। इस बार इनका एक बड़ा झुंड पिछले कई दिनों से यहां आने वाले बर्ड वॉचर्स को आकर्षित कर रहा है। आशा शर्मा ने सांभर झील में हो रही गतिविधियों पर चिंता जताते हुए प्रशासन से पक्षियों के संरक्षण के लिए कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा- पक्षी विशेषज्ञों की माने तो सांभर झील को प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित ठिकाना बनाए रखने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। झील के आस-पास की गतिविधियों को नियंत्रित करना और संवेदनशील प्रजातियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना समय की मांग है, ताकि यह क्षेत्र इन पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय बना रहे। काइट फेस्टिवल और एडवेंचर एक्टिविटी से बढ़ी मुश्किलें एडवेंचर गतिविधियों के अलावा पतंगों और चाइनीज मांझे की वजह से कई पक्षी घायल हो रहे हैं। एनिमल, बर्ड्स एंड स्नेक रेस्क्यू टीम के रोशन कुमावत ने बताया- हाल में एक ग्रेट व्हाइट पेलिकन को चाइनीज मांझे से घायल अवस्था में रेस्क्यू किया गया। मांझे और पतंग की वजह से कई पक्षी झील में दम तोड़ देते हैं, इन्हें बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। अभी एक ही घायल पेलिकन मिला है, सांभर झील में और भी होंगे। जिन्हें रेस्क्यू करना आसान नहीं है। घायल होने वालों में अलग अलग पक्षी है। पेलिकन जैसी प्रजातियां शोरगुल और गतिविधियों के प्रति बेहद संवेदनशील होती है। यहां भी इनका प्राकृतिक आवास बाधित होता है, ये वहां से दूर चले जाते हैं। रोशन ने बताया कि पिछले कुछ सालों में पेलिकन की संख्या में काफी कमी आई है। अब सांभर झील में भी उनका आना कम हो रहा है। पक्षियों पर मंडरा रहा खतरा 2023 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सांभर झील में हो रही गतिविधियों पर सवाल उठाए थे। बावजूद इसके, पर्यटन विभाग यहां एडवेंचर एक्टिविटीज को बढ़ावा दे रहा है। इससे प्रवासी पक्षियों को परेशानी हो रही है। झील के आसपास की गंदगी और फेंकी गई बोतलें भी पक्षियों के लिए खतरनाक साबित हो रही हैं। पर्यटन विभाग ने बर्ड वॉचर डॉ आबिर अली खान को पत्र लिखकर यह जानकारी भी दी थी कि प्रवासी पक्षी कार्यक्रम स्थल से एक किलोमीटर दूर है। जबकि हकीकत में 200 से 300 मीटर की दूरी में यह एक्टिविटीज हो रही है। ऐसे में पक्षियों पर यह खतरा मंडरा रहा है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *