जयपुर में आसमान से आग के गोले गिरे, VIDEO:रहस्यमयी तेज रोशनी ने चौंकाया; एक्सपर्ट बोले- उल्कापिंड हो सकते हैं

जयपुर के आसमान में हुई खगोलीय घटना ने लोगों काे चौंका दिया। शुक्रवार आधी रात शहर के अलग-अलग हिस्सों से आसमान में आग के गोले नजर आए। करीब 1 मिनट तक दिखे ये गोले क्या थे, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, खगोलीय एक्टिविटी पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट उल्कापिंड होने की संभावना जता रहे हैं। आसमान में रात करीब 1.21 मिनट पर ये आग के गोले दिखे थे। राजस्थान में बीते 2 दशक में उल्कापिंड गिरने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। इसलिए एक्सपर्ट के दावे को मजबूत माना जा रहा है। करीब 200 मीटर नीचे तक दिखाई दिए जयपुर शहर के साथ ये आग के गोले जिले के कोटपूतली और अन्य क्षेत्रों में भी दिखे। एक्सपर्ट के अनुसार ये नीचे गिरते हुए 200 मीटर तक दिखाई दिए। इनकी संख्या एक से ज्यादा थी। इनकी स्पीड करीब 72 किलोमीटर प्रति/सेकेंड थी। इन आग के गोलों के वीडियो को रहस्यमयी रोशनी बताकर सोशल मीडिया पर भी शेयर किया जा रहा है। अब देखिए- वो PHOTOS जिन्होंने जयपुराइट्स को चौंकाया… तेज रोशनी ने ध्यान खींचा, आग जैसा नजारा जयपुर शहर में निर्माण नगर, विद्युत नगर, देवी नगर, नंदपुरी, परकोटा सहित अलग-अलग इलाकों में आग जमीन की ओर बढ़ती दिखाई दी। जयपुर के देवी नगर में रहने वाले मोहित पंचारिया ने बताया कि रात में बालकनी की तरफ देखा तो रोशनी की किरणें नजर आईं। कुछ देर में वो गायब हो गईं। उसके बाद हम उलझन में पड़ गए कि आखिर यह क्या था। आसमान साफ होने के कारण रोशनी काफी तेज दिखी। ये आग के गोले या उल्कापिंड जयपुर जिले या प्रदेश के दूसरे हिस्सों में कहीं गिरे हैं या नहीं, इसकी अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है। राजस्थान में पहले भी हो चुकी है ऐसी घटनाएं राजस्थान में अब तक 21 से ज्यादा उल्का पिंड गिर चुके हैं। साल 2000 के बाद, 6 अलग-अलग प्रकार के उल्का पिंडों की पहचान की गई। उन्हें आधिकारिक नाम दिए गए हैं। उल्का पिंडों को उनके गिरने या खोजे जाने के स्थान के अनुसार नाम दिए गए हैं। इनमें इटावा भोपजी (2000), अरारकी (2001), भवाद (2002), कावरपुरा (2006), मुकुंदपुरा (2017), सांचौर (2020) नाम दिए गए हैं। बीते 5 साल की 2 बड़ी घटनाएं

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *