जयपुर में कट-यूटर्न से पहले रम्बल स्ट्रिप बनाने के निर्देश:कलेक्टर ने NHAI, पीडब्ल्यूडी, जेडीए और नगर निगम को लिखा पत्र; कहा- ऐसी जगहों पर स्पीड कंट्रोल जरूरी

एलपीजी ब्लास्ट के बाद जयपुर कलेक्टर ने इन घटनाओं के लिए तफ्तार को जिम्मेवार माना है। कलेक्टर ने हाल ही में लिखे एक पत्र में नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (NHAI), पीडब्ल्यूडी, जेडीए और नगर निगम समेत अन्य एजेंसियों को शहर की मुख्य सड़कों, राष्ट्रीय राजमार्गो, स्टेट हाईवे पर जहां कट है या यूटर्न की स्थिति है। उन जगहों से कुछ दूर पहले रंबल स्ट्रिप्स बनाने के निर्देश दिए है। इसके साथ ही इन रंबल स्ट्रिप्स से पहले कैट्स आई, नियोन साइनेज लगाने के लिए कहा है। इन कट, यूटर्न के पास मुख्य रोड से आने वाले ट्रेफिक की स्पीड को कंट्रोल किया जा सके। कलेक्टर डॉ. जितेन्द्र सोनी ने पत्र में लिखा- ये काम जयपुर, जयपुर ग्रामीण और दूदू जिले की सीमा में आने वाले तमाम स्टेट हाईवे, नेशनल हाईवे मुख्य ग्रामीण सड़क, शहरों की मुख्य सड़कों पर किया जाए। दरअसल, शहर की सड़कों या हाईवे के बीच इस तरह कट या यूटर्न के पास कई जगह स्पीड बेरियर या साइनेज नहीं होने और ट्रेफिक लाइट बंद होने के कारण वाहन तेजी से निकलने का प्रयास करते हैं। कोहरे या अंधेरे में इस तरह से जल्दबाजी में निकलना दुर्घटना का कारण बनता है। रंबल स्ट्रिप्स से स्पीड को कंट्रोल किया जा सकता है कट या यूटर्न से 150 से 200 मीटर पहले अगर रंबल स्ट्रिप्स और उसकी पहचान के लिए कैट्स आई, नियोन साइनेज लगे हो तो वाहन चालक की स्पीड को कंट्रोल किया जा सकता है। ताकि वह कट या यूटर्न तक पहुंचने से पहले गाड़ी की स्पीड धीमी हो जाती है और नियंत्रण में आ जाती है। क्लोवर लीफ के लिए तकनीकी टीम से करवाएं सर्वे कलेक्टर ने अपने पत्र में लिखा- तमाम स्टेट और नेशनल हाईवे पर बने कट पर रोड सेफ्टी तकनीकी टीम से सर्वे करवाएं। जहां उसकी रिपोर्ट के आधार पर जरूरत के अनुसार क्लोवर लीफ, अंडरपास या फ्लाइओवर के निर्माण करवाने के संबंध में राय लें। इसके बाद इसे सक्षम स्तर से स्वीकृत करवाकर मौके पर इनका निर्माण करवाएं। ताकि भविष्य में दुर्घटनाओं को रोका या कम किया जा सके। हाईवे पर निश्चित दूरी पर हो एम्बुलेंस की व्यवस्था कलेक्टर ने अपने पत्र के आखिरी में हाइवे पर निश्चित दूरी पर एम्बुलेंस की सुविधा होने के भी निर्देश दिए, ताकि दुर्घटना के बाद तुरंत बाद जल्द से जल्द वहां पहुंचा जा सके और घायल को कम से कम समय में हॉस्पिटल पहुंचाया जा सके। इसके लिए उन्होंने एक इमरजेंसी मेडिकल प्लान भी हाइवे के लिए तैयार करने के निर्देश दिए।

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