जयपुर में देश का पहला अनूठा मोक्षधाम बनेगा। फरवरी में इसका काम शुरू होगा। इसके लिए 20 हजार वर्गगज एरिया में फैले बी2 बाईपास टोंक रोड स्थित श्मशान घाट का चयन किया गया है। यह इस साल के अंत तक 75 करोड़ की लागत में आध्यात्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो जाएगा। आधुनिक सुविधाओं वाला यह मोक्षधाम सर्व समाज के लिए निशुल्क होगा। 16 से ज्यादा शवदाह स्थल होंगे। गो-काष्ठ निशुल्क होगा। मुख्य द्वार का नाम ‘काशी द्वार’ होगा, जो 120 फीट ऊंचा और 15 फीट चौड़ा होगा। दीवारें 45 फीट लंबी होगी, जिनके दोनों ओर 16 पटल होंगे। बता दें कि हिंदू शास्त्रों में काशी को ऐसा स्थान माना गया है, जहां जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। गरुड़ पुराण में कहा गया है कि काशी का उच्चारण ही आत्मा को शुद्ध कर देता है। श्री माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष केदारमल भाला ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस प्रस्ताव को दो बार देख चुके हैं। उनके मार्गदर्शन में इसे बनाया जाएगा। फरवरी में उनके हाथों ही इसका शुभारंभ होगा। एक हेरिटेज लुक वाला शव वाहन भी सभी के लिए निशुल्क हाेगा। सबसे पहले महादेव के दर्शन काशी द्वार से प्रवेश करते ही महादेव की मूर्ति दिखेगी। 15 फीट चौड़े मार्ग में 45 फीट लंबी दीवारें हैं, जो लोगों के मन में ऐसा प्रभाव पैदा करेंगी, मानो वे किसी दूसरे संसार में प्रवेश कर रहे हों। दीवारें नक्काशीदार पत्थरों से बनी होंगी। 16 संस्कारों का वर्णन दिखेगा मोक्षधाम की परिकल्पना और डिजाइन करने वाले आर्किटेक्ट अनूप बरतरिया ने बताया कि मानव जीवन में 16 संस्कारों को समझना महत्वपूर्ण है। इसीलिए सभी संस्कारों को इसकी सीमा के पटलों पर पत्थर की मूर्ति के रूप में उकेरा गया है। संगमरमर की ये मूर्तियां काशी द्वार के स्मारकीय अस्तित्व को बढ़ाएंगी। द्वार में 14 स्तंभ हैं, जिन्हें मिलाकर स्मारक बनाया है, जो प्रवेश द्वार की तरह दिखता है। इसमें जयपुर वास्तुकला के मेहराब, स्तंभ, नक्काशीदार पट्टियां और छतरियां हैं। अभी हालात ऐसे: दयनीय स्थिति, बैठने की व्यवस्था तक नहीं श्मशान की वर्तमान स्थिति दयनीय है, वहां लोगों के लिए कोई सुविधा नहीं है। अंतिम संस्कार स्थल भी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। वहां कोई इको वुड या गो-काष्ठ की सुविधा नहीं है। विद्युत शवदाह गृह उपयोग नहीं लिया जा रहा है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोई सुविधा नहीं है। पार्किंग अव्यवस्थित है और फुटपाथ टूटे हुए हैं। हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा और स्नान करने के लिए कोई उचित स्थान नहीं है।


