जयपुर में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) ने पांच दिवसीय शिव आराधना के चौथे दिन कार्यक्रम का आयोजन किया। कथा व्यास साध्वी लोकेशा भारती जी ने पार्वती जन्मोत्सव की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा कि माता पार्वती केवल भगवान शिव की अर्धांगिनी नहीं, बल्कि शक्ति, तप, त्याग, मर्यादा और संतुलन की सजीव प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार देवताओं ने सृष्टि के संतुलन हेतु पार्वती स्वरूप शक्ति का आवाहन किया, उसी प्रकार आज के समाज को भी नारी शक्ति के सम्मान, संरक्षण और पूर्ण स्वीकार्यता की नितांत आवश्यकता है। साध्वी जी ने कहा कि यह अत्यंत विडंबनापूर्ण है कि एक ओर राष्ट्र, समाज और राजनीति में नारी को शक्ति के रूप में स्वीकार किया जाता है, वहीं दूसरी ओर आज भी अनेक परिवारों में कन्या के जन्म को बोझ समझा जाता है। कन्या भ्रूण हत्या, घरेलू भेदभाव और सामाजिक असमानता इसी दोहरे मापदंड का परिणाम हैं। जब तक घर-घर में कन्या का सम्मान नहीं होगा, तब तक नारी सशक्तिकरण केवल शब्दों और नारों तक सीमित रह जाएगा। नारी शोषण केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और वैचारिक भी है। असुरक्षा, अवमानना और भेदभाव—ये सभी विकृत चेतना के दुष्परिणाम हैं। समाज का वास्तविक संतुलन तभी संभव है जब नारी को सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकार आत्मिक स्तर पर स्वीकार किए जाएँ।
काम-दहन प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए साध्वी लोकेशा भारती जी ने कहा कि ‘काम’ केवल शारीरिक वासना नहीं, बल्कि हर वह विकार है जो विवेक, संयम और मानवीय मूल्यों को नष्ट कर देता है। भगवान शिव द्वारा काम का दहन आत्मसंयम, वैराग्य और चेतना की जागृति का प्रतीक है। आज उपभोग और आकर्षण की संस्कृति में उलझा मानव जब नारी को भोग की वस्तु के रूप में देखने लगता है, तभी नारी शोषण जन्म लेता है। साध्वी जी ने कहा- काम-दहन लीला केवल एक पौराणिक घटना नहीं, बल्कि चेतना का विज्ञान है। जैसे भगवान शिव ने अपनी दिव्य दृष्टि से काम का दहन कर विकारों का नाश किया, उसी प्रकार आज दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी मानव को दिव्यचक्षु (दिव्य दृष्टि) प्रदान कर ईश्वर का साक्षात्कार करा रहे हैं। साध्वी जी ने कहा इस दिव्य दृष्टि से मनुष्य के भीतर छिपे काम, क्रोध, अहंकार एवं अन्य विकार नष्ट हो रहे हैं, जिससे मानव मन निर्मल, संतुलित और करुणामय बन रहा है। इस अवसर पर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के “संतुलन” प्रकल्प का भी विशेष उल्लेख किया गया। साध्वी जी ने बताया कि यह प्रकल्प नारी शोषण के विरुद्ध चेतना जाग्रत करने, लिंग-समता को प्रोत्साहित करने तथा नैतिक मूल्यों और आत्मबोध की शिक्षा के माध्यम से समाज में एक स्वस्थ एवं संतुलित दृष्टिकोण विकसित करने हेतु निरंतर कार्य कर रहा है। इस अवसर पर डीजेजेएस के संतुलन प्रकल्प का उल्लेख किया गया, जो नारी शोषण के खिलाफ जागरूकता फैला रहा है। इस प्रकल्प के तहत 250 से अधिक कार्यक्रमों से 2,37,211 से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं। कार्यक्रम में भजन, कथा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया। अश्विन देशमुख जी और सतीश तिवारी मुख्य अतिथि थे। कार्यक्रम जे.डी. पैराडाइज, आगरा रोड पर आयोजित किया गया, जहाँ नारी सम्मान का संदेश दिया गया।


