राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS) के ईएनटी विभाग की ओर से कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी पर एक नेशनल लेवल का ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया, जिसमें पंजाब, हरियाणा और राजस्थान अलग-अलग जिलों से आई ईएनटी सर्जनों को कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की ट्रेनिंग दी। इस ट्रेनिंग कार्यक्रम में 6 कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की गईं। इसमें एक सर्जरी ऐसी थी जो एक्टिव इन्सर्शन मॉनिटरिंग (AIM) तकनीक से की गई सर्जरी है। डॉक्टरों का दावा है कि देश में इस तकनीक से पहली बार कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की गई है। ये ट्रेनिंग सेशन दो दिन 29 और 30 जनवरी को चला, जिसमें 5 बच्चों के 6 6 कोक्लियर सर्जरी करके इम्प्लांट किए गए। इस ट्रेनिंग टीम में डॉ. मोहनीश ग्रोवर, डॉ. सुनील समधानी, डॉ. राघव मेहता, डॉ. शशांक नाथ सिंह, डॉ. आशिमा सक्सेना के अलावा एनेस्थीसिया टीम में डॉ. वरुण सैनी, डॉ. सतवीर समेत अन्य डॉक्टर्स शामिल हुए। पहली बार AIM वाला कोक्लियर इंम्पलांट डॉ. मोहनीश ग्रोवर ने बताया- इस ट्रेनिंग सेशन के दौरान जयपुर के जोबनेर की रहने वाली 3 साल की बच्ची के AIM तकनीक से कोक्लियर इंप्लांट किया गया। ये बच्ची ऑडिटरी न्यूरोपैथी स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ANSD) से ग्रस्त थी। ये पहला मौका है, जब इस तकनीक से भारत में इंप्लांट किया गया। इस तकनीक न्यूरल प्रतिक्रियाएं (सुनने-समझने की वेव) भी अत्यंत सशक्त रहीं, जिनका स्तर 100–170 तक दर्ज किया गया, जबकि सामान्यतः यह प्रतिक्रियां 30-60 के स्तर तक ही प्राप्त होती हैं। डॉ. ग्रोवर ने बताया- इस ऑपरेशन की सफलता और रिजल्ट का पता लगाने के लिए बेंगलुरु से एक अनुभवी ऑडियोलॉजिस्ट्स की टीम को जयपुर बुलाया गया, जिन्होंने इस सर्जरी के रिजल्ट पर अमेरिका स्थित अपने समकक्ष विशेषज्ञों के साथ भी साझा कर चर्चा की। 15 माह के बच्चे का दोनों कानों में ट्रांसप्लांट डॉक्टर ग्रोवर ने बताया- इस ट्रेनिंग सेशन के दौरान ही जयपुर के रहने वाले 15 माह के बच्चे शिफान के दोनों कानों का भी इंप्लांट किया गया। उन्होंने बताया- MAA योजना के तहत 2 साल या उससे छोटे बच्चों का दोनों कानों का इंप्लांट करने का प्रावधान है। जबकि तीन ऐसे बच्चे थे जिनके एक-एक कान का इंप्लांट किया गया।


