बैतूल में जयस ने वन विभाग पर आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। इस मामले में संगठन ने प्रशासन को चेताया है कि 15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो वह 26 जनवरी को काला दिवस मनाएगा और वन अधिकारियों के पुतले फूंकेगा। संगठन ने कलेक्टर को इस मामले में ज्ञापन भी सौंपा है। संगठन के जिलाध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्य संदीप कुमार धुर्वे ने बताया कि बैतूल जिले में वन विभाग ने राजस्व ग्रामों की सार्वजनिक और निस्तारी प्रयोजन की जमीनों को अपने कब्जे में ले लिया। लगभग 74 हजार हेक्टेयर दखल रहित भूमि और 7500 हेक्टेयर नारंगी वन भूमि को वर्किंग प्लान में शामिल कर लिया गया। यह जमीनें राजस्व विभाग के अभिलेखों में दखल रहित दर्ज हैं। 18 दिसंबर 2024 को राजस्व विभाग ने विधानसभा में प्रश्न क्रमांक 1048 के तहत बताया कि इन जमीनों का आवंटन कभी कलेक्टर ने वन विभाग को नहीं किया और न ही राजस्व विभाग ने इन्हें सौंपा। इसके बावजूद वन विभाग ने इन जमीनों पर कब्जा कर लिया है। जयस का आरोप है कि 1960 से वन विभाग ने आदिवासियों की निजी भूमि को भी वर्किंग प्लान में शामिल कर कब्जा कर लिया। आदिवासियों को उनकी निजी भूमि से बेदखल कर दिया गया, और वहां वृक्षारोपण और वनोपज की कटाई तक कर दी गई। राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन जयस ने इस मुद्दे पर राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन कलेक्टर बैतूल को सौंपा। जयस ने मांग की है कि 15 दिनों के भीतर वन विभाग के कब्जे और कार्यों पर संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए। कार्रवाई न होने पर 26 जनवरी को काला दिवस मनाते हुए पुतला दहन किया जाएगा। जयस ने राष्ट्रपति और राज्यपाल से संविधान की 5वीं अनुसूची की धारा 5(2) के तहत आदिवासियों को संरक्षण देने की विशेष जिम्मेदारी निभाने की अपील की है।


