देश की आजादी से जुड़ा सबसे अहम स्मारक जलियांवाला बाग नेशनल मेमोरियल प्रशासनिक सुस्ती और 3 साल से सिस्टम की चुप्पी के घेरे में फंसा है। हालात यह हैं कि 2019 से अब तक बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की एक भी बैठक नहीं हुई है। इस वक्त ट्रस्ट में कोई नामित सदस्य नहीं, जो कि बाग के हालात सरकार तक पहुंचाए। नामित सदस्यों का कार्यकाल 2023 का पूरा हो चुका है। तब से नए नामित सदस्य नियुक्त नहीं हुए। इसी कारण बाग मरम्मत कार्य के लिए तरसता रहता है। यहां लकड़ी की रेलिंग जगह–जगह से टूटी हैं। एंट्री गली में 2021 में रेनोवेशन के समय लगाए लकड़ी के डेकोरेटिव गाडर भी गायब हैं। कंपनी ने तिरपाल लगाकर बाग की बदहाली को ढंका हुआ है। इतिहासकार और अमृतसर के चिंतक नरेश जौहर की आरटीआई के जवाब में संस्कृति मंत्रालय ने जवाब दिया है कि 2019 में ट्रस्ट का नया स्ट्रक्चर बनाया गया था। अंतिम बार 2018 में नामित सदस्य नियुक्त किए गए थे। जिनका 5 साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। 3 साल से नए सदस्य नामित नहीं किए गए। इसी का नतीजा है कि बाग में प्रबंधन में बार-बार खामियां सामने आती हैं। कंपनी मनमर्जी से मेंटेनेंस कर रही है। ऐतिहासिक जलियांवाला बाग रखरखाव के अभाव में बदहाल होता जा रहा है। जलियांवाला बाग स्मारक का नवीनीकरण 2019 और 2021 के बीच किया गया था। तब लकड़ी की नई रेलिंग लगाने के अलावा और कई काम हुए थे। मगर बाद में देखभाल नहीं हुई। गौरतलब है कि जलियांवाला बाग में शाम के समय शहीदों की गाथा सुनाने–दिखाने वाला लाइट एंड साउंड शो 5 महीने की जद्दोजहद के बाद 3 फरवरी को फिर शुरू हो पाया था। सितंबर 2025 में बारिश का पानी बेसमेंट में चला गया था। इससे सिस्टम की वायरिंग और मशीनरी खराब हुई। जिसे ठीक करवाने में कंपनी ने 5 महीने लगा दिए। इतिहासकार नरेश जौहर ने बताया कि आरटीआई का जवाब देने में संस्कृति मंत्रालय ने 7 महीने लगा दिए। खर्च और विकास कार्यों को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्रालय का जवाब और भी चौंकाने वाला है। आदेश में कहा गया है कि 2019 के बाद ट्रस्ट को मंत्रालय से कोई फंड जारी नहीं किया गया। बाग, जो 1919 के नरसंहार का प्रतीक और देश की सामूहिक स्मृति का अहम हिस्सा है, उसके ट्रस्ट की वर्षों तक निष्क्रियता कई गंभीर सवाल छोड़ती है। आरटीआई के जवाब में साफ किया गया है कि 2018 में पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल, पूर्व सांसद तरलोचन सिंह और राज्यसभा सदस्य श्वेत मलिक को नामित सदस्य बनाया गया था।


