कूड़े से सीएनजी बनाने की तैयारी में निगम, 13 एकड़ में लगेगा प्लांट

शहर से निकलने वाले कूड़े की प्रोसेसिंग कर सीएनजी गैस बनाने की तैयारी है। इसके लिए निगम डेयरी कांप्लेक्स में 13 एकड़ जगह कंपनी को अलॉट करेगा जिसकी अंदरखाते प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। अलॉटमेंट लैटर मिलने के बाद कंपनी की ओर से प्लांट लगाने का काम शुरू कराया जाएगा। प्लांट तैयार होने में करीब 8 माह लगेंगे मगर बरसात के कारण देरी भी हो सकती है। हालांकि एक बार प्लांट बनकर तैयार होने के बाद लंबे समय तक प्रोसेसिंग कर सीएनजी व कंपोस्ट बनाने का काम चलता रहेगा। खास बात यह है कि घरों से निकलने वाले कूड़े से एएसआर स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी सीएनजी गैस बनाएगी। 3 ट्रॉमल मशीनें मंगवाई जा चुकी है बाकी मशीनरी धीरे-धीरे लाई जा रही है। एकबार सेटअप तैयार हो गया तो शहर में कूड़े की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। कंपनी ने प्लांट को लेकर प्लान व डिजाइन तैयार कर लिया है। प्लांट पूरी तरह से कवर्ड बनाया जाएगा जिससे कूड़ा प्रोसेसिंग के दौरान किसी भी तरह की दुर्गंध बाहर नहीं जाएगी। इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम के आधार पर कूड़े का निपटान कराया जाएगा। प्रोसेसिंग में जलने वाले कूड़े को मशीन से अलग कर दिया जाएगा। जिसे आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) कहते हैं। वहीं, न जलने वाला कूड़ा प्रोसेसिंग पर मिट्टी के रूप में बाहर आएगा जिसका उपयोग सड़कों में किया जा सकता है। हालांकि, यह प्लांट लगाने के बाद एक पेंच यह भी फंसेगा कि डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन, सेग्रीगेशन व प्रोसेसिंग का टेंडर 3 साल के लिए हुआ है। काम बेहतर करने की स्थिति में निगम 8 साल तक धीरे-धीरे करके बढ़ा सकता है लेकिन टेंडर की अवधि नहीं बढ़ी तो कंपनी को प्लांट लगाने के बाद करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। टेंडर 3 साल में खत्म कर दिया गया तो कंपनी को प्लांट भी हटाना होगा। वहीं प्लांट के तैयार होने से शहर में कूड़े की समस्या का काफी हद तक हल हो जाएगा और वाहनों के लिए ईंधन भी उपलब्ध होगा। इ ससे पर्यावरण बेहतर होगा और शहर को साफ- सुथरा रखने में भी काफी मदद मिलेगी। 100 टन गीले कचरे से करीब 4000 किलो सीएनजी तैयार हो सकती है। सब स्टेशनों से बड़ी गाड़ियों में गीला कचरा प्लांट पर पहुंचाया जाता है। प्रोसेसिंग के बाद 20 से 25 दिन में रॉ बायो गैस तैयार होती है। रॉ बायोगैस में मीथेन का 45 से 50% कम होता है, जिसको अपग्रेड करने के लिए गैस क्लीनिंग सिस्टम में गैस भेजी जाती है। गैस को एक बड़े बलून में स्टोर करके प्रोसेस शुरू होता है। बाकी कॉर्बन डाइ ऑक्साइड को मीथेन से अलग किया जाता है। क्लीनिंग के बाद मीथेन का प्रतिशत 90 से 95 हो जाता है। इसके बाद गैस कंप्रेस्ड कर सीएनजी तैयार की जाती है।

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