पंजाब पुलिस की स्पेशल ब्रांच में एएसआई बलजिंदर सिंह न सिर्फ अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं, बल्कि 25 साल से बॉक्सिंग के जरिए युवाओं की जिंदगी भी संवार रहे हैं। अब तक बलजिंदर द्वारा प्रशिक्षित 136 से ज्यादा बॉक्सिंग खिलाड़ी सरकारी नौकरी हासिल कर चुके हैं। 48 साल के मुख्य कोच बलजिंदर सिंह ने देश को हजारों बॉक्सिंग खिलाड़ी दिए हैं। इनमें से कई खिलाड़ी देश-विदेश में स्टूडेंट्स को कोचिंग दे रहे हैं, जबकि कई निजी संस्थानों में बतौर कोच सेवाएं दे रहे हैं। बलजिंदर सिंह बताते हैं कि साल 1991 में जब खालसा कॉलेज सीनियर सेकंडरी स्कूल में 9वीं कक्षा में पढ़ते थे तब हॉकी खेलते थे। 14 साल की उम्र में एक घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। स्कूल ग्राउंड में 2 स्टूडेंट्स आपस में झगड़ रहे थे। उन्हें छुड़ाने के लिए बलजिंदर आगे बढ़े, लेकिन झगड़ा कर रहे छात्रों में से एक, जो बॉक्सिंग सीख रहा था, ने उनके चेहरे पर जोरदार पंच मार दिया। उसी दिन उन्होंने हॉकी छोड़कर बॉक्सिंग को अपना करिअर बनाने का फैसला कर लिया। 1999 में नौकरी मिलने के बाद उनके गुरु जोगिंदर सिंह मान ने बच्चों को बॉक्सिंग सिखाने के लिए प्रेरित किया। तब से आज तक वह बिना किसी फीस के बच्चों को प्रशिक्षण दे रहे हैं, ताकि अच्छे खिलाड़ी के साथ-साथ अच्छे इंसान भी बन सकें। बलजिंदर सिंह बताते हैं कि आज उनके 35 से ज्यादा स्टूडेंट डॉक्टर, इंजीनियर और प्रिंसिपल बनकर समाज सेवा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उनका मानना है कि खिलाड़ी बनना जरूरी नहीं, लेकिन अच्छा इंसान बनना सबसे जरूरी है। फिलहाल 5 से 25 साल तक के बच्चे उनसे बॉक्सिंग सीख रहे हैं। नियमों के मुताबिक 11 साल से कम उम्र के बच्चों को बॉक्सिंग की अनुमति नहीं है, लेकिन बच्चों के जुनून को देखते हुए वह उन्हें सीखने से मना नहीं करते। खास बात यह है कि बलजिंदर सिंह रोजाना सुबह 6.30 से 8.30 बजे और शाम 4.30 से 6.30 बजे तक खालसा कॉलेज स्कूल में खिलाड़ियों को बॉक्सिंग की फ्री कोचिंग देते हैं। 4 घंटे की इस मेहनत के बदले वह बच्चों से एक पैसा भी नहीं लेते। इतना ही नहीं, आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों की मदद के लिए वह कई बार अपनी सैलरी से पैसे खर्च कर जरूरी खेल सामग्री भी खरीद कर देते हैं। उनका मकसद है कि कोई भी होनहार खिलाड़ी सिर्फ पैसों की कमी की वजह से पीछे न रह जाए। वर्तमान में करीब 80 स्टूडेंट्स बॉक्सिंग का प्रशिक्षण ले रहे हैं।


