गर्ल्स हॉस्टल की छात्राएं हाथों में जली हुई रोटियां और पोहे लेकर कलेक्ट्रेट पहुंच गई। यहां उन्होंने हॉस्टल प्रशासन के मुर्दाबाद के नारे लगाए। एक बार तो छात्राओं को देख कलेक्ट्रेट आने वाले लोग चौंक गए। छात्राओं का आरोप है कि हॉस्टल वार्डन का व्यवहार सही नहीं हैं, वे आती हैं और साइन करके चली जाती हैं। सब्जियों में कई बार कीड़े निकलने हैं। सब्जी खाने लायक नहीं होती। रोटियां जली हुई और कच्ची होती हैं। हॉस्टल में मेन्यू के हिसाब से खाना नहीं बन रहा है। 20 दिन से नाश्ते में पोहे खिला रहे हैं। जिसमें सेव ही नहीं होती। इस हॉस्टल में या तो अब वॉर्डन रहेगी या हम मामला बांसवाड़ा के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका हॉस्टल का है। छात्राएं आज सुबह कलेक्ट्रेट पहुंची थी। यहां उन्होंने कलेक्टर के नाम ज्ञापन भी सौंपा जिसमें वार्डन को हटाने की मांग की है। कस्तूरबा गांधी छात्रावास की मॉनिटरिंग करने वाले अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक विनोद कुमार ने बताया कि पहली बार इस तरह की शिकायत आई है। छात्राओं से जानकारी ले रहे हैं। जांच भी कर रहे है, संबंधित मामले में कार्रवाई भी करेंगे। वार्डन ममता सोलंकी ने बताया कि कल ही जयपुर की टीम छात्रावास में निरीक्षण करके गई हैं। विजिटर बुक में भी उन्होंने बढ़िया लिखा है। तब तक तो छात्राओं को कोई परेशानी नहीं थी। यह झूठे व बेबुनियाद आरोप हैं। किसी ने बच्चियों को गुमराह किया है। ‘हम खाना बनाने को मजबूर’ 12वीं की छात्राओं ने कहा- ये जली हुई रोटियां लेकर हमें यहां आना पड़ा। हॉस्टल में सब्जी भी पानी जैसी मिलती है। हॉस्टल में रहने वाली बालिकाएं ही अब खुद का खाना खुद बनाने को मजबूर हैं। जब हम खाना बनाने वाली बाई को बोलते हैं तो वे अभद्र भाषा का उपयोग करती हैं। मैडम ममता सोलंकी हमें कोचिंग जाने से भी रोकती हैं। जो सामान हमें मिला ही नहीं उस पर साइन करवा दिया जाता था। कंप्यूटर सीखाने को भी कोई टीचर नहीं है। कंप्यूटर रूम में जाले लगे हैं। दवाइयां ही नहीं हैं। हमें गलत दवा दे दी थी। एक साथी बीमार पड़ गई थी। ‘वार्डन सिर्फ साइन करने आती हैं’ छात्राओं ने हॉस्टल वार्डन पर आरोप लगाते हुए कहा- मैडम हॉस्टल में आती ही नहीं है। केवल साइन करने आती हैं और चली जाती हैं। छात्राओं ने बताया- न तो हमें सर्दी के मौसम में स्वेटर दिया है न ही हॉस्टल में गर्म पानी की सुविधा है। हॉस्टल में छात्राओं से जुड़ा सामान भी पूरा नहीं दिया जा रहा है। कल से सभी की छुट्टियां हैं और हम अपने-अपने घर चली जाएंगी। जबरन घर भेज देती हैं मैडम छात्राओं ने बताया- कभी-कभी तो ऐसी हालत हो जाती है कि 2-3 दिन की छुट्टियों में भी हमें घर जाना पड़ता है। वार्डन मैडम खुद जबरन हमें घर भेज देती हैं। साथ ही, कई वर्षों से उन्हें मिलने वाली छात्रवृत्ति का भी कोई हिसाब नहीं दिया गया है। परीक्षा सिर पर, हमें न्याय चाहिए छात्राओं ने चेतावनी दी है कि उनकी परीक्षाएं नजदीक हैं और इस मानसिक प्रताड़ना के बीच वे पढ़ाई नहीं कर पा रही हैं। यदि वार्डन को तत्काल प्रभाव से नहीं हटाया गया, तो वे छात्रावास खाली कर देंगी।


