900 करोड़ रुपए के जल जीवन मिशन घोटाले में एसीबी ने पकड़े गए पांचों आरोपियों को गुरुवार सुबह कोर्ट में पेश किया। जहां से पांचों आरोपियों को एक दिन की पुलिस रिमांड पर सौपा गया। अदालत ने एसीबी की तीन दिन की मांग के बावजूद उन्हें एक दिन की रिमांड पर दिया गया है। एसीबी टीम सभी पांचों आरोपियों को आमने सामने बैठाकर पूछताछ करेगी। अब तक हुई पूछताछ में जलदाय विभाग के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मिली है। वहीं दूसरी ओर एसीबी टीम ने गुरुवार दोपहर पीएचडी डिपार्टमेंट से कुछ फाइले और डॉक्यूमेंट जब्त किए है। एसीबी डीजी गोविंद गुप्ता ने बताया- जल जीवन मिशन घोटाले मामले में साद 2023 में दर्ज एफआईआर पर कार्रवाई की गई थी। एसीबी की गठित एसआईटी में बुधवार को 5 आरोपी महेश कुमार मित्तल (प्रोपराइटर- गणपति ट्यूबवेल), उनके बेटे हेमन्त मित्तल उर्फ गोलू, पीयूष जैन (प्रोपराइटर- श्याम ट्यूबवेल), उमेश कुमार शर्मा (मैनेजर/ लाइजनिंग ऑफिसर, श्याम ट्यूबवेल) और गोपाल कुमावत (तत्कालीन लेखाधिकारी, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी)) को गिरफ्तार किया था। एसीबी ने पांचों आरोपियों को गुरुवार को कोर्ट में पेश कर एक दिन की रिमांड पर लिया है। इसके साथ इन आरोपियों से नक्शा मौका तस्दीक करवाने के लिए इनके ठिकानों पर लेकर जाएगी। एसीबी की एक टीम गुरुवार को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के मुख्यालय जल भवन पहुंची थी। वहां से जल जीवन मिशन से जुड़ी फाइल जुटाई गई है। एसीबी की ओर से इस पूरे मामले में जांच को और आगे बढ़ाया गया है। आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढे़गा यह कार्रवाई ग्रामीण जल आपूर्ति परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोप में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के एक दिन बाद की गई। गिरफ्तार किए गए लोगों में एक विभागीय अधिकारी भी शामिल है। एसीबी ने जेजेएम से जुड़े सभी मामलों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। इस टीम ने पीएचईडी कार्यालय का दौरा कर निविदाओं, अनुमोदनों, स्वीकृति नोट्स, भुगतान जारी करने और जेजेएम कार्यों के निष्पादन से संबंधित महत्वपूर्ण आधिकारिक रिकॉर्ड जब्त किए। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है। जांचकर्ता अनुमोदन और निर्णय लेने की प्रक्रिया को समझने के लिए एक पूर्व वरिष्ठ पीएचईडी अधिकारी से पूछताछ कर सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि नए दस्तावेजी साक्ष्य से यह स्थापित करने में मदद मिलेगी कि निविदाएं कैसे आवंटित की गईं, कार्य कैसे निष्पादित हुए और कथित अनियमितताओं में धन का प्रवाह कैसे हुआ। जांच का मुख्य केंद्र पॉइंट यह पता लगाना है कि गणपति ट्यूबवेल और श्याम ट्यूबवेल को निविदाएं कैसे आवंटित की गईं। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि इन फर्मों को किस आधार पर प्राथमिकता दी गई और क्या अनुमोदन प्रक्रिया के दौरान मानदंडों का उल्लंघन हुआ। अधिकारी ने कहा, “हम भुगतान जारी करने, मापन पुस्तकों, कार्य निष्पादन रिकॉर्ड और संबंधित फाइलों की जांच कर रहे हैं ताकि घटनाओं की पूरी श्रृंखला स्थापित की जा सके।” राज्य सरकार ने 9 दिसंबर को पीएचईडी के छह अधिकारियों, जिनमें एक पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) शामिल हैं, के खिलाफ विस्तृत जांच की स्वीकृति दी थी। एजेंसी ने यह संभावना नहीं जताई है कि एसआईटी के सभी प्रासंगिक दस्तावेजों की जांच पूरी करने के बाद पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किए जा सकते हैं। जेजेएम मामला ग्रामीण जल आपूर्ति अनुबंधों के आवंटन में भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण गहन जांच के अधीन आ गया है, जिसमें जांचकर्ताओं को संदेह है कि ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच जाली दस्तावेज, फर्जी बिल और साठगांठ की प्रथाएं हो सकती हैं। 5 पॉइंट में समझें, क्या है जल जीवन मिशन घोटाला?


