नई दिल्ली के वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के वैज्ञानिकों की सलाह पर ग्वालियर नगर निगम शहर की सड़कों को जल भराव से मुक्त बनाने जा रही है। इसमें नगर निगम की 240 किलोमीटर की सड़कों को शामिल किया जाएगा। अब प्लानिंग पर काम तेज होने लगा है। निगम ने जिन दो कंपनियों को चुना है। उन्होंने गुरुवार को बाल भवन में आकर आयुक्त संघ प्रिय के सामने प्रजेंटेशन दिया है। दोनों में से एक कंपनी को फाइनल करने के लिए पांच सदस्यीय टीम अपना फैसला देगी। तब कहीं सर्वे का काम शुरू होगा। तीन करोड़ रुपए में सर्वे का काम पूरा किया जाएगा। शहर में जल भराव के 200 से ज्यादा स्थल है। जहां पर जरा सी बारिश में जल भराव होने लगता है। सर्वे पर 3 करोड़ रुपए होंगे खर्च, शहर में 200 से ज्यादा जगह हुआ था जलभराव जल भराव वाले चिह्नित क्षेत्र जाग्रति नगर, गिर्राज कॉलोनी, हुजरात चौराहा, जिंसी नाला, लक्कड़खाना, एसएएफ रोड, आनंद नगर, ट्रांसपोर्ट नगर, शताब्दीपुरम, सिटी सेंटर, चेतकपुरी रोड, लक्कड़खाना-छप्परवाला पुल आदि शामिल हैं। मिट्टी की जांच के साथ हाइड्रोलिक अध्ययन होगा जल निकासी प्रणाली के साथ सड़कों के निर्माण कार्य के लिए विस्तृत परियोजना में मिट्टी की जांच, यातायात सर्वेक्षण, सड़कों और आसपास जल निकासी, नाले और नदियों के लिए जल विज्ञान और हाइड्रोलिक अध्ययन होगा। सड़कों और जल निकासी प्रणाली के डिजाइन के लिए क्षेत्र का परीक्षण किया जाएगा। चुनी गई कंपनी मौके का चित्र, अनुमान आदि तैयार करेगी। संबंधित क्षेत्रों में बाढ़ के मुद्दों को कम करना तय होगा। नाले-नदी का जल विज्ञान और हाइड्रोलिक सर्वेक्षण नाले-नदियों के लिए जल विज्ञान और हाइड्रोलिक सर्वेक्षण पानी की गति, वितरण और प्रबंधन का वैज्ञानिक अध्ययन है। जिसमें जल चक्र, जल संसाधनों और बाढ़ जैसी घटनाओं को समझना शामिल है। जल विज्ञान सर्वे में पानी के प्रवाह की दर और वर्षा का आकलन होता है, जबकि हाइड्रोलिक सर्वे में पानी के प्रवाह के भौतिक पहलुओं का विश्लेषण किया जाता है।


