जांच करने वाले अफसर की गलती से बरी हुए आरोपी:थाने में मौत की सूचना 10:26 बजे मिली; इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर ने 9:35 पर शव पीएम के लिए भेजा

शहर के कैंट इलाके में होमगार्ड सैनिक को फांसी के लिए उकसाने वाले आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है। होमगार्ड सैनिक ने अपनी गर्लफ्रेंड और उसके परिवार वालों पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाते हुए सुसाइड किया था। उसने दो पेज का एक सुसाइड नोट भी छोड़ा था। इस मामले में इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर की एक गलती ने पूरा मामला संदिग्ध कर दिया। दरअसल, उसने केस डायरी में घटना की सूचना मिलने का समय 10:26 बताया और शव को पीएम के लिए भेजने का समय 9:35 बताया। कोर्ट ने कहा कि मौत की सूचना मिलने से पहले शव को पीएम के लिए कैसे भेजा जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि “संदेह कितना भी प्रबल क्यों न हो, सबूत की जगह नहीं ले सकता।” पहले मामला जान लीजिए। मामला वर्ष 2023 का गुना में कैंट इलाके के मंगवार गांव का है। यहां रहने वाले लेखराज लोधा की ड्यूटी राघोगढ़ थाने में थी। वह मंगवार से अप-डाउन करता था। 15 जून को उसकी गर्लफ्रेंड और उसके परिवार ने लेखराज के खिलाफ कैंट थाने में रेप की शिकायत की थी। उसे थाने में बुलाया भी गया था। ड्यूटी के बाद वह अपने घर लौटा। 16 जून को सुबह कमरे में फांसी लगा ली। दोस्तों को भी भेजा सुसाइड नोट परिजन ने बताया कि लेखराज चार भाई-बहन में सबसे छोटा था। दो बड़े भाई और बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। मामा के बेटे हीरालाल लोधा ने बताया कि गुरुवार रात लेखराज ने सुसाइड नोट लिखा। अपने कुछ दोस्तों को यह नोट भेजा भी, लेकिन जब तक वे लोग कुछ कर पाते, बहुत देर हो चुकी थी। सुबह लेखराज के पिता उसे जगाने पहुंचे तो वह फंदे पर लटका था। लोग दरवाजे की कुंडी तोड़कर उसके कमरे में एंटर हुए थे। कोर्ट मैरिज का दबाव बनाया गया हीरालाल के मुताबिक, लेखराज को लड़की से शादी करने के लिए मजबूर किया जा रहा था। 15 जून वह राघोगढ़ थाने में ड्यूटी पर पहुंचा। वहां से उसको दोपहर में कैंट थाने बुलाया गया। उस पर कोर्ट मैरिज के लिए लिखा-पढ़ी करने का दबाव बनाया गया। वे लोग (लड़की वाले) पैसे भी मांग रहे थे और शादी का भी कह रहे थे। वहां पता नहीं क्या लिखा-पढ़ी हुई। उसके माता-पिता तो शादी के लिए राजी थे। कल शाम से ही ऐसा लग रहा था कि उसके साथ जबरदस्ती की जा रही है। पढ़िए, सुसाइड नोट में क्या लिखा… मैं लेखराज लोधा, पिता रघुवीर लोधा। मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं। इसकी वजह 3 लोग हैं। बात तीन साल पुरानी है। मैं और गर्लफ्रेंड (यहां लड़की का नाम है) प्यार करते थे। लेकिन, कुछ महीने बाद गर्लफ्रेंड के घर पर हमारे बारे में पता चल गया। इसके बाद भी वह मुझसे बात करती रही। एक साल निकल गया। सब अच्छा चल रहा था। फिर वह मुझसे पैसे मांगने लग गई। 5 हजार, कभी 10 हजार, इस तरह से और मैं देता गया। गर्लफ्रेंड और उसके माता-पिता द्वारा मुझसे पैसे मांगे गए। कैश में (हाथों-हाथ) मैंने दे दिए। इसके बाद कई बार हम मिले भी। इस तरह दो-ढाई साल निकल गए। इसके बाद मुझ पर ये तीनों शादी का दबाव डालने लग गए और मुझे डरा-धमकाकर एक स्टाम्प पर साइन करवा लिए। अब मुझे ये लोग हर रोज परेशान करने लग गए। शादी के लिए। न की तो थाने जाने की धमकी देते हैं। मेरे अलावा ये लड़की 2-3 लड़कों से और बात करती है। लड़की के पिता ने 8-10 लाख रुपए मांगे एक दिन लड़की के पिता ने मुझे लाल परेड ग्राउंड पर बुलाकर 8-10 लाख रुपए की मांग की। मैं होमगार्ड सैनिक, मेरे पास इतने पैसे नहीं थे, तो मैंने कुछ समय मांगा। उन्होंने कहा- ठीक है। कुछ समय बाद मुझसे फिर पैसों की मांग की गई। इसके चलते मैंने कुछ समय के लिए अपना नंबर बंद कर लिया। इन तीनों ने मेरे खिलाफ 15/06/2023 को थाने में जाकर रिपोर्ट कर दी। यह बोलकर कि मैंने इनकी लड़की का रेप किया है। और ये तीनों मेरे खिलाफ झूठी FIR कराने के लिए पहुंच गए। मुझे थाना बुलाया और मुझसे शादी करने की बात कही। थाने में मेरी बात सुने बिना FIR करने का आदेश दे दिया, क्योंकि वो एक लड़की थी इसलिए। जैसे-तैसे मैं वहां से निकल गया, कुछ कागजी कार्रवाई कर…। लेकिन, मैं इन तीनों से परेशान हो चुका हूं। इसलिए मैं इन तीनों के कारण आत्महत्या कर रहा हूं। मैं इन तीन लोगों से बहुत परेशान हो चुका हूं। मेरी मौत के जिम्मेदार ये तीन लोग हैं। मुझे माफ कर देना मम्मी-पापा। मेरे मरने के बाद ये लोग मेरे परिवार पर इल्जाम लगा सकते हैं। इसमें मेरे परिवार की गलती नहीं है। इन तीनों के कारण ही आत्महत्या कर रहा हूं। इस मामले में कैंट पुलिस ने सैनिक की गर्लफ्रेंड, उसके माता पिता को आरोपी बनाया। उन पर सुसाइड के लिए उकसाने की धाराओं में मामला दर्ज किया गया। कैंट थाने के ASI भूपत सिंह परिहार ने इस मामले की विवेचना की। गर्लफ्रेंड के पिता को गिरफ्तार किया गया। वह 22 दिन जेल में रहे। विवेचना के बाद कोर्ट में चालान पेश किया गया। विवेचक की एक गलती ने बदली दिशा दरअसल, इस मामले में इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर की एक गलती ने कोर्ट में पूरे मामले को संदेह में डाल दिया। कोर्ट में केस डायरी के साथ जमा किए गए दस्तावेजों और विवेचक के बयानों में वह गलती पकड़ में आई। विवेचक ने कोर्ट में बयान दिया कि उसे कैंट थाने पर लेखराज की मौत की सूचना 10:26 बजे मिली। वहीं कोर्ट में जमा किए गए दस्तावेजों के अनुसार मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए 9:35 बजे भेज दिया गया और 10:55 पर शव का पीएम हुआ। कोर्ट ने कहा को इस तथ्य के हिसाब से यारी मौत की सूचना 10:26 बजे मिली, तो 9:35 बजे शव को पीएम के लिए भेजा ही नहीं का सकता। यह परिस्थिति विवेचना कार्य में हुई त्रुटि को बताती है। कोर्ट ने कहा कि यह मान भी लिया जाए कि सुसाइड नोट मृतक ने ही लिखा था, तब भी ऐसी परिस्थिति प्रकट नहीं हो रही कि आरोपियों ने लेखराज को इतना प्रताड़ित किया कि वह आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाए। संदेह कितना ही प्रबल क्यों न हो, सबूत की जगह नहीं ले सकता। सुनवाई के बाद कोर्ट ने तीनों आरोपियों को बारी कर दिया।

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