छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में प्रशासन की सतर्कता से एक नाबालिग लड़की का बाल विवाह रुक गया। जिला कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देश पर कार्रवाई की गई। बाल विवाह की सूचना मिलते ही जिला बाल संरक्षण अधिकारी गजेंद्र सिंह जायसवाल के नेतृत्व में टीम ग्राम लटिया पहुंची। जांच में पता चला कि लड़की की उम्र 17 वर्ष 1 माह है। यह विवाह की कानूनी उम्र से कम थी। नाना-नानी करवा रहे थे बाल विवाह जानकारी के मुताबिक, लड़की अनाथ है। उसके माता-पिता का कई साल पहले देहांत हो चुका है। नाना-नानी उसकी परवरिश कर रहे हैं। उन्होंने ही उसका विवाह तय किया था। टीम ने परिवार को बाल विवाह के दुष्परिणामों से अवगत कराया। विवाह रोकने की सहमति परिवार ने विवाह रोकने की सहमति दे दी। गवाहों की मौजूदगी में घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए। इस दौरान जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन टीम और अकलतरा थाना पुलिस मौजूद रही। बाल विवाह कानून के बारे में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के मुताबिक, लड़की की शादी की उम्र 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है। इससे कम उम्र में विवाह कराने पर माता-पिता, रिश्तेदार और पंडित पर कार्रवाई हो सकती है। इस अपराध में 2 साल तक का कारावास और 1 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।


