धौलपुर के जारगा गांव में शुक्रवार को ‘क्षय मुक्त भारत’ संकल्प को साकार करने की दिशा में एक विशेष चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। ग्राम के गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर में लगे इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच करना और टीबी (क्षय रोग) की समय पर पहचान कर प्रभावी उपचार सुनिश्चित करना था। शिविर में धौलपुर से आई विशेषज्ञ चिकित्सा टीम ने आधुनिक संसाधनों के साथ लगभग 200 ग्रामीणों की जांच की। अभियान के तहत टीबी के संदिग्ध मरीजों के लिए मौके पर ही निशुल्क डिजिटल एक्स-रे और खून की जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिससे ग्रामीणों को बाहर भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ी। चिकित्सा विशेषज्ञों ने बताया कि टीबी की शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर इसका उपचार अधिक सरल और प्रभावी होता है, जिससे बीमारी के प्रसार को भी रोका जा सकता है। टीम ने जांच के साथ-साथ ग्रामीणों को टीबी के लक्षण, बचाव के उपाय और नियमित उपचार की आवश्यकता के बारे में भी जानकारी दी। शिविर में पाए गए संदिग्ध मामलों को आगे की विस्तृत जांच और उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से फॉलो-अप में लिया गया है। इस अभियान को सफल बनाने में गठित विशेष कमेटी के सदस्यों का उल्लेखनीय योगदान रहा। रेडियोग्राफर हरेंद्र गिरी, मलखान सिंह और अमित वर्मा ने तकनीकी और व्यवस्थागत सहयोग प्रदान किया। वहीं, स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की एएनएम अनीता और जारगा के प्रमुख समाजसेवी अटलबिहारी गोयल ने घर-घर जाकर ग्रामीणों को जागरूक किया और शिविर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। आयोजन समिति ने कहा कि गांव के हर नागरिक का स्वास्थ्य उनकी प्राथमिकता है और समय पर जांच व सही जानकारी ही टीबी को जड़ से खत्म करने का एकमात्र उपाय है। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना की। स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिया कि ‘क्षय मुक्त भारत’ के लक्ष्य को जमीनी स्तर पर साकार करने के लिए ऐसे शिविर आगे भी आयोजित किए जाएंगे।


