जालंधर में थाने पर ग्रेनेड अटैक के आरोपियों को झटका:मोहाली NIA अदालत ने जमानत याचिका खारिज की, अभी तक जेल में बंद हैं

पंजाब के जालंधर में मकसूदां थाना पर सात साल पहले 2018 में हुए ग्रेनेड अटैक के आरोपियों को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत से झटका लगा है। अदालत ने हमले के मुख्य तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की है। इन आरोपियों में आमिर नजीर, शाहिद और फाजिल बसीर शामिल हैं। यह फैसला मामले की गंभीरता, आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े आरोप और सबूतों को देखते हुए लिया गया है। एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 427, 153, 153ए, 153बी के साथ-साथ अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट की धारा 10, 13, 15, 16, 18, 20 और 23 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। कश्मीर से पहले चंडीगढ़ आए थे NIA की जांच में यह साफ हो चुका है कि आरोपी खालिस्तान समर्थक आतंकी संगठनों से जुड़े हुए थे। वह पंजाब में आतंक फैलाने की साजिश रच रहे थे। तीनों आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में हैं और जेल में बंद हैं। इस मामले में NIA चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इसके मुताबिक 9 सितंबर 2018 को जालंधर के वेरका प्लांट के पास आतंकी संगठन के एक अज्ञात सदस्य से 4 हैंड ग्रेनेड एकत्र किए गए। उसके बाद 13 सितंबर को रूफ अहमद मीर और उमर रमजान कश्मीर से चंडीगढ़ हवाई जहाज के जरिए पहुंचे, जहां से वह सड़क मार्ग से जालंधर गए। हैंड ग्रेनेड से किए थे चार धमाके थाना मकसूदां पर चार हैंड ग्रेनेड से धमाके किए गए थे। इसमें बाद में पुलिस जांच में एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज के दो कश्मीरी छात्र शाहिद और फाजिल बशीर को सबसे पहले गिरफ्तार किया गया था। इनमें से एक को जम्मू-कश्मीर के अवंतीपुरा से और एक को जालंधर से गिरफ्तार किया गया था। इन दोनों आरोपियों का संबंध आतंकवादी संगठन गजवत-उल-हिंद से बताया गया था। संगठन के सरगना जाकिर राशिद भट उर्फ जाकिर मूसा की अगुवाई में पूरे देश में सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की साजिश रची गई थी।

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