भास्कर न्यूज | हजारीबाग प्रातः दिगंबर जैन मंदिर बड़ा बाजार में संपदा दीदी व अनीता दीदी का मंगल उद्बोधन हुआ। सर्वप्रथम मंगलाचरण विजय लुहाड़िया के द्वारा हुआ। विजय लुहाड़िया ने बताया कि संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी की प्रमुख ग्रंथ मुखमाटी श्रृंखला का उद्बोधन संपदा दीदी बांड़म बाजार मंदिर में प्रतिदिन अपने मंगल प्रवचन में कर रही थी। मुखमाटी ग्रंथ में गहन दर्शन होते हुए जीवन की व्यवहारिकता झलकती है। मुख माटी जैसे ग्रंथ को पढ़कर साधना, संयम और आत्म कल्याण की राह और अधिक स्पष्ट हो जाती है। यह ग्रंथ जीवन को सुधारने वाली और धर्मपथ पर अग्रसर करने वाला मार्गदर्शक है। समस्त समाज की ओर से संपदा दीदी को निवेदन किया कि वह आज ऐसे ही सरल ग्रंथ को अपनी सरल वाणी से हम सभी को मार्गदर्शन दें। संपदा दीदी ने आज जिनवाणी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैन धर्म की यह आत्मा है। यह तीर्थंकरों का अनंत ज्ञान का सार है, जिनवाणी हमें रत्न्त्रय सिखाती है। मोक्ष मार्ग संभव केवल या तीन रत्न से संभव प्राप्त किया जा सकता है। वह है सम्यक दर्शन ज्ञान और चरित्र। साधु संतों आर्यिकाओं का संपूर्ण साधना जिनवाणी पर आधारित है। संपदा दीदी ने श्रावक को जिनवाणी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिनवाणी हमारी सबसे पवित्र धरोहर है। इसे सदैव सम्मानपूर्वक रखें और पढ़ते समय पूरी श्रद्धा रखें। कहा गिले हाथ या द्रव्य से स्पर्श न करें और पठन के बाद उचित स्थान पर स्थापित करें। जिनवाणी केवल ज्ञान नहीं, मोक्ष का मार्ग है। जिनवाणी सिर्फ पढ़ने की पुस्तक नहीं, जीवन सुधारने का मार्ग है। ज्ञान की वृद्धि होगी। इसे श्रद्धा से पढ़ें, अनुशासन से रखें और अपमान से बचें।संध्या में दोनों मंदिरों में महाआरती का कार्यक्रम हुआ। तत्पश्चात बड़ा बाजार मंदिर जी में दीदी ने बच्चों की धार्मिक कक्षा ली व सभी से प्रश्न पूछे गए। प्रतिदिन आठ बजे दीदी का मंगल प्रवचन बड़ा बाजार हॉल में होगा।


