जिला अस्पताल का आंचल मदर मिल्क बैंक शिशुओं के लिए वरदान साबित हाे रहा है। बैंक से समय पर मिलने वाले दूध से अस्पताल में भर्ती और पालना गृह में आए अब तक 9000 नवजात काे जीवनदान मिला है। बैंक के शुरू हाेने से अब तक 7 साल में 8 लाख 34 हजार 105 एमएल दूध का दान किया है। जिले की 14823 महिलाओं की ओर से अब तक बैंक में रजिस्ट्रेशन करवाया गया है। इसमें 3203 माताओं की ओर से दूध डाेनेट किया गया है। अस्पताल की एमसीएच विंग में बना मदर मिल्क बैंक से बाड़मेर ही नहीं अन्य जिले भी लाभान्वित हाे रहे हैं। जून 2018 में मिल्क बैंक से एक साथ 1000 यूनिट दूध अजमेर भेजा गया और इश्यू किया गया। मिल्क बैंक से जन्म से 28 दिन के शिशुओं या जिसका वजन 2.5 किलाे से कम है, उसी शिशु काे दूध दिए जाने का नियम बना रखा है ताकि जरूरतमंद काे आसानी से दूध से मिल सके। इससे अधिक आयु का शिशु बाहर का दूध भी पी सकता है। बैंक में दूध काे स्टाेर करने के बाद अस्पताल की सैंट्रल लैब के माइक्राेबायाेलाॅजी विभाग में बनी लैब में कल्चर के लिए भेजा जाता है। रिपाेर्ट के निगेटिव आने के बाद दूध काे इश्यू किया जाता है ताकि किसी प्रकार के बैक्टिरीया से बचा जा सके और शिशु स्वस्थ रहे। अस्पताल के भर्ती 8779 तथा पालना गृह के 37 शिशुओं काे मिला जीवनदान मिल्क बैंक से अस्पताल में भर्ती नवजात तथा पालना गृह के शिशुओं काे प्राथमिकता से दूध दिया जा रहा है। अब तक अस्पताल में ही भर्ती 8 हजार 679 तथा पालना गृह के 37 शिशुओं काे दूध दिया गया है। मिल्क बैंक में सुबह 9 से शाम 5 बजे तक दूध की जरूरत पड़ने पर संबंधित नर्सिंग स्टाफ से संपर्क कर दूध ले जा सकता है। बैंक में 275 यूनिट दूध स्टोरेज है। जिला अस्पताल में ही अब तक 25 हजार 621 यूनिट दूध डाेनट किया गया है। दूध काे डाेनर रूम से इकट्ठा कर प्राेसेस रूम में भेजा जाता है। यहां दूध काे पाश्च्युरीकृत कर कल्चर के लिए भेजा जाता है। स्टाफ की ओर से दूध काे सप्ताह में दाे से तीन बार पाश्च्युरीकृत किया जाता है। इसके लिए सभी प्रकार के उपकरण माैजूद है। स्तनपान प्रावधान केंद्र में बैंक इंचार्ज करते हैं माताओं की काउंसलिंग बैंक में बने संपूर्ण स्तनपान प्रावधान केंद्र में बैंक इंचार्ज पुष्पाकंवर, मंजु भाटी, सुशील चाैधरी, गंगा चाैधरी, सुनीता पंवार, दूधा दान करने वाली धात्री महिलाओं की काउंसलिंग करती है। महिलाओं के ब्लड सैंपल तथा सभी प्रकार की जांचें हाेने के बाद ही डाेनर बनाई जाती है। जाे महिलाएं किसी राेग से ग्रसित व जांच रिपाेर्ट में अस्वस्थ पाई जाती है, उन्हें डाेनर नहीं बनाया जाता। बैंक में 14823 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया है। इनमें से स्वस्थ 3203 माताओं के दूध काे लिया है। “मां का दूध बच्चे के लिए अमृत है, जन्म के आधे घंटे के अंदर मां का स्पर्श व दूध जरूरी है। मां के दूध के बिना शिशु के शारीरिक विकास में विकार हाेने की संभावना रहती है। ऐसे में मिल्क बैंक से दूध इश्यू करवाकर शिशु काे पिलाना चाहिए। प्रत्येक मां काे शिशु काे दूध पिलाने के बाद बचे दूध हाे डाेनेट करना चाहिए ताकि बच्चाें काे जीवनदान मिल सके।” -डाॅ. महेंद्र चाैधरी, शिशु राेग विशेषज्ञ (मिल्क बैंक प्रभारी)।


