जयपुर में शनिवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) चौकी धौलपुर इकाई ने बड़ी कार्रवाई की। जहां जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में तैनात प्रशासनिक अधिकारी सुनील गोयल को रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए पकड़ा। पीड़ित से रिश्वत के तौर पर अधिकारी ने 10 हजार रुपए की मांग शाला दर्पण पर आईडी जेनरेट करने के नाम पर मांगे थे, जिसमें 3000 रुपए 13 फरवरी व 7000 रुपए 15 फरवरी को देने के लिए जयपुर बुलाया था। पैसे मिलने के बाद ही शाला दर्पण पर आईडी जेनरेट करने की बात कही थी, जिसकी शिकायत 9 फरवरी को एसीबी फाउंडेशन की ओर से लगाए गए कैंप में पीड़ित ने की थी। सुनील गोयल जून 2025 में सेवानिवृत्त होने वाला है। कार्रवाई धौलपुर एसीबी चौकी के एडीएसपी सुरेंद्र सिंह ने की। भांडौर-खुर्द स्थित आनंद विद्या निकेतन के संचालक तेजपाल ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारी सुनील गोयल कार्यालय में स्कूल की मान्यता के काम को देखता है। वह हर प्राइवेट स्कूल संचालक से खुलेआम कार्यालय में रिश्वत मांगते थे, जो रिश्वत नहीं देता था उसका काम करते नहीं थे। इसी कारण आज तक मेरे विद्यालय को 8वीं की मान्यता नहीं मिली। बिना पैसे लिए रिश्वतखोर अधिकारी कोई काम नहीं करता था। इससे पहले भी छात्रवृत्ति फॉर्म भरने के नाम पर भी पैसे मांगे गए थे लेकिन पैसे ना होने की वजह से मैं रिश्वत नहीं दे पाया और मेरे स्कूल के 250 बच्चों की छात्रवृत्ति का फॉर्म नहीं भर पाया। तब से लेकर आज तक मैं अपने स्कूल के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति का फॉर्म नहीं भरता। कुछ दिन पहले शाला दर्पण की आईडी जेनरेट करने के लिए भी समस्या लेकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय गया था जिसकी 5 फरवरी आखिरी तारीख थी, आईडी जेनरेट करने की एवज में सुनील गोयल ने मुझसे पैसे की मांग की थी। रिश्वतखोर अधिकारी सुनील गोयल ने ₹10,000 रुपए जयपुर लेकर आने को कहा था। जयपुर में ही 13 फरवरी को 3000 रुपए व 7000 जयपुर में दिए थे। उच्च अधिकारी कार्यालय में बैठते ही नहीं, इसलिए एसीबी से की थी शिकायत पीड़ित ने बताया शिक्षा विभाग में उच्च अधिकारी कभी कार्यालय बैठते ही नहीं है। जब भी मुलाकात के िलए जाओ तो अधिकारी मिलते ही नहीं थे और अपने ही भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई करना चाहता ही नहीं था। सुनील गोयल खुलेआम रिश्वत की मांग करता था। सवा दो साल में तीन ट्रेप,एक घोटाला और पकड़े 4 भ्रष्टाचारी रेल्वे स्टेशन के सामने स्थित जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) कार्यालय में सवा दो साल में चार भ्रष्टाचारी रंगे हाथों पकड़े जा चुके हैं। इस अवधि में शिक्षक, स्कूल और ठेकेदार सभी से रिश्वत वसूली गई। साथ ही सवा करोड़ रुपए के एक बड़े घोटाले को भी अंजाम दिया जा चुका है। सितंबर 2022 में एडीईओ गोपाल कुंतल और सहायक कर्मचारी भुवनेश चंसोरिया को 15 हजार रुपए रिश्वत वसूलते गिरफ्तार किया गया था। यह रिश्वत बच्चों को बांटे जाने वाले पोषाहार आपूर्ति में कमीशन के बतौर वसूली जा रही थी। इसी तरह मई 23 में एडीईओ सुनील कुमार अग्रवाल शिक्षक से आठ हजार रुपए की रिश्वत वसूलते पकड़ा गया। शिक्षक को डीईओ रामेश्वर दयाल बंसल ने परिवीक्षा काल दुबारा करने का आदेश निकाला था। डीईओ से संशोधित आदेश निकलवाने के नाम पर यह रिश्वत वसूली गई।


