जिला अस्पताल का मामला:4 साल से मेडिसिन विशेषज्ञ नहीं, रिटायर हो रहे पीडियाट्रिशियन, दो एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और चाहिए

जिला अस्पताल को सौ से दो सौ बेड का करने के लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है, लेकिन डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की भारी कमी के कारण ज्यादातर मरीजों को पीबीएम हॉस्पिटल ही जाना पड़ रहा है।एसपी मेडिकल कॉलेज शहर की पांच लाख की आबादी को कवर करने वाले जिला अस्पताल में चार साल से मेडिसिन का डॉक्टर नहीं लगा पा रहा है, जबकि अस्पताल में रोज करीब 300 मरीजों का ओपीडी रहता है। विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण मरीजों को पीबीएम जाना पड़ता है। हालांकि 15-15 दिन के लिए सीनियर रेजिडेंट्स की ड्यूटी रहती है, लेकिन ये बदल-बदल कर भेजे जाते हैं। स्थायी डॉक्टर नहीं होने के कारण मरीजों में इलाज को लेकर विश्वास नहीं बन पाता। पीडिया में अगले महीने से कोई डॉक्टर नहीं होगा। पीडियाट्रिक्स में नियोनेटल आईसीयू है और एक ही शिशुरोग विशेषज्ञ है, जो फरवरी में रिटायर हो रहे हैं। इसी प्रकार सर्जरी और ऑर्थो में एक-एक डॉक्टर है, जबकि इनका प्रतिदिन आउटडोर 150 से अधिक है। इन्हें सर्जरी भी करनी पड़ती है। वर्तमान में अस्पताल में दो एनेस्थीसिया के डॉक्टर हैं, जबकि चौबीस घंटे सिजेरियन की सुविधा के लिए दो अतिरिक्त एनेस्थीसिया विशेषज्ञ चाहिए। गौरतलब है कि राज्य में 930 डॉक्टर एपीओ चल रहे हैं। उनके पास कोई काम नहीं है, जबकि यहां सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। नाम का है मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल जिला अस्पताल केवल नाम का ही मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल रह गया है। मेडिसिन, सर्जरी, गायनी, पीडिया, नेत्ररोग, ऑर्थो, स्किन, डेंटल, ईएनटी के ओपीडी चलते हैं, लेकिन डॉक्टरों की भारी कमी है। मानसिक रोग और श्वसन रोग विशेषज्ञ शुरू से ही नहीं हैं। स्टाफ के पद 2007 में स्वीकृत हुए थे। उसके बाद बढ़ाए ही नहीं, जबकि काम बढ़ चुका है। हर महीने औसत 50 हजार मरीजों का ओपीडी रहता है। जूनियर रेजिडेंट के पद समाप्त करने से बढ़ी समस्या चिकित्सा विभाग में जूनियर रेजिडेंट के पद खत्म करने से जिला अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी खलने लगी है। पहले 12 जूनियर रेजिडेंट रहते थे, जिससे मरीजों को मेडिसिन सहित विभिन्न बीमारियों का इलाज मिलता था। वर्तमान में मनोरोग विशेषज्ञ, मेडिकल ज्यूरिस्ट और चेस्ट फिजिशियन की भी जरूरत है। मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना और जांच योजना के बाद अस्पताल में काम का स्तर कई गुना बढ़ गया है, लेकिन चिकित्सकों और स्टाफ के पदों में बढ़ोतरी बिल्कुल नहीं हुई है। “अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की जरूरत है। मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। वर्कलोड भी बढ़ रहा है, जबकि स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है।” -डॉ. सुनील हर्ष, अधीक्षक, जिला अस्पताल

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *