जिला स्तरीय कार्यशाला में खेजड़ी का मुद्दा उठाने पर बवाल:सोलर प्लांटों के लिए खेजड़ी काटे जाने का मुद्दा उठते ही कलेक्टर ने कहा- यह एजेंडे में नहीं

मानव-वन्यजीव संघर्ष पर जिला स्तरीय कार्यशाला में सोमवार को खेजड़ी का मुद्दा उठाने पर बवाल हो गया। पर्यावरण प्रेमियो ने जैसे ही सोलर प्लांट और खेजड़ी पर बोलना शुरू किया तो जिला कलेक्टर ने यह कहते हुए बोलने से रोका कि यह बिंदू एजेंडे में शामिल नहीं है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक बैठक में वीसी से जुड़े। जीव रक्षा संस्था के अध्यक्ष मोखराम धारणिया ने कहा कि सोलर आने से राज्य वृक्ष खेजड़ी का लाखों की संख्या में कटान हुआ है, जो बदस्तूर जारी है। इससे हजारों जीव जंतुओं और पक्षियों के घरौंदे उजड़ गए। शेड्यूल प्रथम के प्राणी चिंकारा हिरन, गिरगिट, गोयरा, सांप आदि वन्य जीवों की खेजड़ी काटते समय मौत के घाट उतार दिया। उनकी फोटो सहित वन विभाग को लिखित में दिया, लेकिन आज तक वन्य जीव अधिनियम कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। उन्होंने सवाल किया कि खेजड़ी के कटान के दौरान इन वन्य जीवों को संरक्षण दिया तो कहां शिफ्ट किया? कोई अधिकारी जवाब नहीं दे सका। जिला कलेक्टर ने एजेंडे का बिंदू नहीं होने के कारण मोखराम को रोकना चाहा, लेकिन वे बोलते रहे। उन्होंने कहा कि वन्य जीव केवल वन भूमि पर नहीं रहते। वन विभाग हर साल वन्य जीवों की गणना करता है, जो सरकारी रिकॉर्ड होता है। उसके बावजूद बिंदू एजेंडे में क्यों नहीं शामिल किया गया। वन मंडल बीकानेर के डीएफओ, वन्य जीव डीएफओ, सहायक वन संरक्षक श्रीडूंगरगढ़ ही बैठक में आए। वन्य जीव के घायल होने पर 0151-2527901 पर कॉल करें : बैठक में उपवन संरक्षक ( वाइल्ड लाइफ) संदीप कुमार छलानी ने बताया कि किसी जानवर के घायल होने या शिकार की घटना होने पर वाइल्ड लाइफ कंट्रोल रूम नंबर 0151-2527901 पर कोई भी फोन कर सकता है। खेजड़ी काटने पर मरी बांडी (सांप)। फाइल फोटो कार्यशाला में ये फैसले लिए गए 1. जोड़बीड़ गिद्ध संरक्षण क्षेत्र में आवारा कुत्तों से गिद्धों को बचाने के लिए मृत पशुओं के चारों तरफ डिच फैंसिंग की जाएगी। 2. शहर में पांच हैक्टेयर जमीन पर रेस्क्यू सेंटर खुलेगा। एनजीओ और गोशालाओं के सहयोग से रेस्क्यू वार्ड भी खोले जाएंगे। 3. करंट की जगह बायो फैंसिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। 4. बंदरों को पकड़ने के लिए नगर निगम करेगा टेंडर। सांसद और विधायक वीसी से नहीं जुड़े मानव-वन्यजीव संघर्ष पर जिला स्तरीय कार्यशाला में सांसद और पूर्व व पश्चिम के विधायकों को भी आमंत्रित किया गया था। तीनों में ना कोई आया ना ही वीसी से जुड़े। वन विभाग सहित 16 तरह के विभागों के अधिकारियों को बुलाया गया था। काफी कम अधिकारी बैठक में पहुंचे। मोखाराम ने कहा कि साल में कम से कम तीन मीटिंग वन एवं वन्य जीव संरक्षण के लिए रखनी चाहिए। वन्यजीव के घायल होने पर देर से पहुंचते हैं अधिकारी : कार्यशाला में घायल वन्य जीवों के लिए रेस्क्यू सेंटर के लिए नगर निगम से पांच हैक्टेयर जमीन दिलाने की बात जिला कलेक्टर ने कही तो मोखाराम ने इस मुद्दे पर वन अधिकारियों की पोल खोलकर रख दी। उन्होंने कहा कि वन्य जीव के घायल होने की सूचना मिलने के बाद भी विभाग के अधिकारी चार-पांच घंटे बाद मौके पर आते हैं। वन्य जीवों के रेस्क्यू सेंटर तक नहीं है। गश्ती दल हर रेंज में है, लेकिन गश्त करने कोई नहीं निकलता। शिकारियों का मुकाबला करने के लिए वन रक्षकों के पास हथियार और गाड़ी तक नहीं है।

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