5 सालों से बंद पड़ी पीएपी की सर्विस लेन को खोलने के लिए पीएपी के अंदर लगे 100 के करीब पेड़ों को ट्रांसप्लांट करना एनएचएआई के लिए चुनौती जरूर होगी, लेकिन ये अब कठिन नहीं है, क्योंकि दिल्ली-जम्मू-कटड़ा एक्सप्रेस के रास्ते में आते गांव सहम में 100 साल से ज्यादा पुराने 5 पेड़ों का सफल ट्रांसप्लांट एनएचएआई कर चुकी है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी के इंजीनियर सुमेश ने बताया कि रैंप तैयार करने के लिए जो गाइड लाइन जारी की जाएगी। उसी के हिसाब से काम किया जाएगा। एनजीटी की गाइडलाइन है कि हाईवे के बीच आए पेड़ को हर संभव बचाने की कोशिश की जाए। सुरिंदर सिंह| जालंधर विकास के लिए सोच बदलने लगी है। जालंधर सिटी में पीएपी चौक, डीएवी कॉलेज फ्लाईओवर, बस स्टैंड फ्लाईओवर और मकसूदां फ्लाईओवर बनाने के लिए एक हजार पेड़ काटे गए। इन्हें ट्रांसप्लांट करने के बारे में कभी नहीं सोचा गया। लेकिन पहली बार जालंधर सिटी में पीएपी प्रशासन ने पुल बनाने के लिए 750 मीटर जमीन हाईवे अथॉरिटी को देने का फैसला किया है। वह भी शर्त के साथ। एडीजीपी एमएफ फारुखी ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी की प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रियंका मीना को पत्र लिखकर कहा है कि पहले एनएचएआई को पेड़ों को पीएपी कांप्लेक्स के अंदर ट्रांसप्लांट कराना होगा। ये पेड़ दो से तीन दशक पुराने हैं। पीएपी प्रशासन ने हाईवे अथॉरिटी को ये भी लिखा है कि पेड़ों के साथ बनी सैरगाह भी दोबारा बनाकर देनी होगी। तभी पुल बनाने के लिए जमीन मिल पाएगी। पीएपी चौक से रेलवे लाइन तक बाउंड्री वॉल पर गोलाकार कांटेदार और रेजर गैल्वेनाइज्ड आयरन कंसर्टिना सुरक्षा बाड़ लगाकर दी जाए। जब दीवार तैयार हो जाए तो उसको सफेद करके दिया जाए। इसी तरह से अन्य किसी भी चीज का नुकसान होता है तो उसे ठीक करवाकर दिया जाए। तब रैंप तैयार करने के लिए जमीन दी जाएगी।


