ठंडी हवाओं और कोहरे के साथ नए साल का स्वागत किया जाएगा, क्योंकि पिछले दो दिनों से मौसम इसी प्रकार का बना हुआ है। पिछले 48 घंटे में दिन और रात के तापमान में बदलाव हुआ है। न्यूनतम तापमान 12 डिग्री तक पहुंच गया है। अब ठंडी हवाओं का दौर पर शुरू हो चुका है। मौसम विभाग की माने तो नए साल के पहले सप्ताह में कड़ाके की ठंड रहेगी, धार सहित ग्रामीण अंचल में मावठे की बारिश के बाद मौसम में फिर बदलाव हो रहा हैं, साल के अंत में ठंड ने दस्तक दी है। मंगलवार की शुरुआत कोहरे के साथ हुई हैं, सुबह के समय कोहरा छाया रहा। फोरलेन पर चालकों को दृश्यता कम होने के कारण वाहन चलाने में दिक्कतें आई हैं। इधर आसमान में भी बादलों का डेरा होने के कारण ठंडी हवाओं की गति अधिक रही। हालांकि सुबह 10 बजे के बाद हल्की धूप निकलने से लोगों को थोड़ी राहत भी मिली। मौसम वैज्ञानिक प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि पश्चिमी-उत्तरी भारत में वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव है। एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी गुजर रहा हैं, इस वजह से दो दिन ओले गिरने के साथ बारिश हुई थी। फसलों को फायदा दरअसल इस साल दिसंबर की सर्दी ने टेंड बदल दिया हैं, पिछले 10 सालों का रिकाॅर्ड और ट्रेंड देखें तो दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में कड़ाके की ठंड पड़ती रही हैं, लेकिन इस बार पहले ही पखवाड़े में तेज सर्दी का असर है। बता दें कि नवंबर में भी सर्दी अपना रिकाॅर्ड तोड़ चुकी है। दिसंबर माह के शुरुआती दिनों से ही ठंड का असर बढ़ने लगा हैं, इस साल की सबसे ठंडी रात 10 दिसंबर की रही हैं, तब न्यूनतम तापमान 7.8 डिग्री पहुंच चुका था। रबी के सीजन की पहली मावठे की बारिश फसलों के लिए फायदेमंद भी रहेगी। किसान आशीष यादव के अनुसार गेहूं, चना और मक्का की फसलों के लिए बारिश वरदान साबित हुई हैं, लेकिन वहीं मटर, लहसुन, प्याज और धनिये की फसलों को बारिश से नुकसान होने की आशंका है। क्योंकि मटर पककर टूटने के लिए तैयार हैं। किसानों के अनुसार गेंहू को मिली बारिश शत-प्रतिशत फायदा देगी। अब ठंड का दौर बढ़ना चाहिए, बारिश के बाद ठंड बढ़ने से फसलों की ग्रोथ अच्छी रहती है। एक नजर में तापमान


