अमृतसर | देवी भागवत पुराण मां जगदंबा का स्वरुप है। कथा कोई भी हो माता अवतार कोई भी हो लीला कोई भी हो पर अकसर एक बात लिखी होती है। राजन अगर मां किसी को अपना बना ले तो जिसको मां अपना बना ले वह अपने जिंदगी का तकदीर जैसे चाहे वैसे खुद लिख सकता है। उसको किसी और के लिखे होने की आवश्यकता नहीं होगी। आपको जानकर यह आश्चर्य होता कि जो कहते हैं कि दुनिया में भगवान नहीं है या मां सुनती नहीं है। अभी भारत पाक की जो लड़ाई चल रही थी। उसमें भारत पाक का बार्डर जैसलमेर है वहां एक माता का मंदिर है। पाकिस्तान ने दो चार दिन पहले सबसे ज्यादा बारूद उसी मंदिर में गिराया था। परंतु जहां तक मां के मंदिर का क्षेत्र था वहां जितनी मिसाइल गिरी उनमें से एक भी नहीं फटी। क्यों हमने आपको बताया कि देवी भागवत में यह बात स्पष्ट लिखी है कि अगर मां की दी गई शक्तियों का सद्उपयोग किया तो मां भगवती उसके बाद चली जाएगी। वहीं अगर मां की दी शक्तियों से मां को अपमानित करने का प्रयास किया को तो शक्ति की छाया तो रहेगी नाम तो रहेगा पर शक्ति चली गई तो क्या होगा। मिसाइलों में नाम तो मिसाइल का था पर भगवती की शक्ति से उनके अंदर से शक्ति चली गई। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई यह चार धर्म दुनियां में है। इनमें से अगर मुस्लिम को पूछो की आपके घर में कौन पैदा हुआ है तो वह बोलेगा मुस्लिम, ईसाई को पूछो तो वह बोलेगा ईसाई और सिख को पूछोगे तो वह बोलेगा सिख है। वहीं अगर किसी हिंदु से पूछोगे तो वह कभी नहीं कहेगा कि हिंदू पैदा हुआ है। हिंदुओं में पैदा होते है ब्राह्मण, क्षत्रिय, जाट, बनियां। पहले हमने अपनी जातियां बांटी। निरंकारी सनातन वाले को नहीं मानेंगे, तो सनातन वाले राधा कृष्ण को नहीं मानेंगे इसमें न प्रकार के धर्म वाले हैं। उसके बाद अपने ग्रंथों को बांट लिया। जब श्री गुरु ग्रंथ साहिब किसी रास्ते से जाते हैं तो किसी सिख की मजाल नहीं की वह अपनी नजरे ऊंची उठाएं। परंतु आज हमारे ग्रंथों की स्थिति यह है कि हमारे घरों में हमारे ग्रंथ पड़े-पड़े सड़ जाते हैं क्यू? हिंदू यह सोचता है कि हमारे ग्रंथ घरों में रखकर पूजा करने के िलए हैं। हमारे लिए ऐसा कहा जाता था कि भागवत घरों में रखने से जब मन बेचैन हो जाए तो उसे पढ़ लिया जाए। वहीं अंत में हमनें लाल कपड़े में अपने ग्रंथों को लपेट कर रख लिया। अंतिम में हिंदुओं ने अपने ग्रंथों को भी बांट लिया। भागवत वाले रामायण नहीं सुनेंगे, रामायण वाले शिव महापुराण नहीं सुनेंगे। आज हिंदुओं की दुर्दशा इसलिए ज्यादा है कि हिंदुओं के घरों में ही ग्रंथों का अपमान शुरू है। इसलिए यह मजार पर जाकर चादर चढ़ाते हैं और चर्च में जाकर कैंडल जलाते हैं और फिर कहते हैं कि हमारे भगवान हमारी सुनते नहीं हमारी मां हमारी सुनती नहीं। पहले हमें खुद में झांक कर देखो। जैसे कि यह प्रवचन चौक फव्वारा स्थित श्री पंचायती बड़ा मंदिर श्री रघुनाथ में ब्यास गद्दी पर विराजमान शुभम तिवारी ने आठवें दिन की कथा में कहे।


