सतीश कपूर | अमृतसर इस बार 27 मई को शनि जयंती शहर के मंदिरों में मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में शनि देव की आराधना से व्यक्ति को रोग, कर्ज और शत्रुओं से मुक्ति प्राप्त होती है। ज्योतिषाचार्य में शनिदेव को न्यायाधीश का स्थान दिया है। शनि सभी जातकों को उनके कर्मों के आधार पर फल देते हैं। इस तिथि पर कृत्तिका, रोहिणी नक्षत्र के साथ सुकर्मा योग बन रहा है। इस संयोग में पूजा करने पर जिन लोगों के जीवन में साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव होता है वह कम हो सकता है। आमतौर पर धार्मिक ग्रंथों में शनि महाराज के प्रभाव और उनकी महिमा का उल्लेख देखने को मिलता है। वहीं कहा जाता है कि जो लोग लक्ष्य को पूरा करने में कड़ी मेहनत और हमेशा अच्छे कर्म करते हैं उन पर शनिदेव हमेशा मेहरबान रहते हैं। ज्योतिषाचार्य राम अवतार का कहना है कि ज्येष्ठ माह की अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है। इस तिथि पर शनिदेव जी का जन्म हुआ था। इस बार अमावस्या तिथि 26 मई दोपहर 12 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी जो 27 मई को सुबह 8:31 पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार 27 को शनि जयंती मनाई जाएगी।


