बंडा | कृषि उपज मंडी परिसर में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन कथा व्यास पं. रामगोपाल दास छोटे मुरारी बापू ने कहा कि जिसे संसार में सब जगह से ठुकरा दिया जाता है उसे संत महात्मा अपनाते हैं। संतों का कार्य ही निराशा से आशा की ओर ले जाना होता है। जीवन जीने के लिए हमेशा अच्छे विचारों की जरूरत होती है, इसलिए अपने मन मस्तिष्क में अच्छे और सकारात्मक विचार ही लाना चाहिए। भरत मिलाप की मार्मिक कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में भरत जैसा भाई मिलना मुश्किल है। आज सभी धन और राजसी वैभव के लिए रिश्तों का त्याग तक कर देते हैं, परंतु भरत ने भाई के लिए राजपाट का त्याग कर दिया और राम की खड़ाऊ लेकर मुनिवेश धारण कर भक्ति का परिचय दिया। पति-पत्नी के लिए सुखमय जीवन के लिए एक दूसरे के विचारों को समझना चाहिए। पति-पत्नी के रिश्तों में कभी स्वार्थ नहीं होना चाहिए। विचारों का जीवन में बहुत महत्व होता है, जिसके जैसे विचार होते हैं, उसकी दशा भी वैसी ही हो जाती है। नारी को नारायणी बताते हुए कहा कि जिस घर में नारी का सम्मान नहीं होता है वहां देवता भी कभी निवास नहीं करते हैं। जब राम शबरी के आश्रम पहुंचते हैं तो वहां पर शबरी वर्षों से उनकी प्रतीक्षा कर रही थी। जीवन में अगर निस्वार्थ सेवा भाव होगा तो भगवान को भी भक्त के घर आना पड़ेगा। सबरी भगवान के दर्शन कर इतनी भाव विभोर हो गई कि जूठे बेर ही भगवान को खिलाती है। नवधा भक्ति की व्याख्या करते हुए कहा कि संतों की सेवा करना, भगवान का भजन एवं कथा सुनना, गुरु की सेवा करना, भगवत संकीर्तन करना, गुरु मंत्र का जाप करना, हमेशा संतों का आदर करना, जो कुछ मिले उसी में संतुष्ट रहना, स्वप्न में भी किसी की निंदा एवं बुराई नहीं करना, भगवान के भरोसे सादा जीवन जीना भक्ति ही सिखाती है। कथा में मुख्य यजमान आयुषी आशीष सराफ, रामराज कुर्मी, पप्पू सागर, श्रीकांत सराफ, बसंत पटेल, राजेंद्र मिश्रा, अखिलेश रावत, मूरत सिंह यादव, हरिश्चंद्र ठाकुर झागरी, परसोत्तम गोस्वामी, बृजेश राय, हरिहरण शिक्षक, नारायण तिवारी, गणेश प्रसाद समेत महिलाएं और कथा प्रेमी उपस्थित थे।


