जिस घर में माता-पिता के आंसू बहते हों उस परिवार के पुण्य नष्ट हो जाते हैं: शास्त्री

भास्कर न्यूज| बारां शहर में मांगरोल रोड स्थित प्राचीन मंदिर प्यारेरामजी में चल रही शिव महापुराण की कथा के दसवें दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। आचार्य भूपेंद्र शास्त्री ने कहा कि जिस घर माता, पिता, बुजुर्गों के आंसू बहते हो उस घर के पुण्य स्वतः नष्ट हो जाते हैं। शिव महापुराण भक्ति और योग का एक दर्शन है। इसके प्रतिदिन श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते है। शास्त्री ने कहा कि शिव महापुराण में ओम नमः शिवाय शिव का प्रभावकारी व असरकारी मंत्र है। इस मंत्र के प्रतिदिन जाप करने मात्र से व्यक्ति रोग व भय मुक्त होता है। आचार्य ने कहा कि कल्पना ज्ञान से महत्वपूर्ण है। हम जैसी कल्पना करते है वैसे ही हो पाते है, लेकिन मार्ग ज्ञान से मिलता है। शिव महापुराण के अनुसार सूर्य उदय से सूर्यास्त तक भगवान शिव का समय होता है। वह रात्रि में अपने तीसरे नैत्र से तीनों लोकों को देखते हैं। व्यक्ति को मदिरापान, कटुवचन और क्रोध तथा अहंकार से बचना चाहिए। भोजन के वक्त मन में किसी प्रकार का पाप अथवा भोजन के प्रति तिरस्कार की भावना नहीं लाना चाहिए। आचार्य ने कथा में ध्रुव, जलंधर, बृहस्पति, इंद्र, माता पार्वती की कथाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि गरीब में भगवान बसता है, गरीब की दुआ भी ईश्वर के आशीर्वाद से कम नहीं होती। इसलिए हमें कभी निर्बल को नहीं सताना चाहिए। पशु समान नहीं इंसान रूपी बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि भोग थकता है, योग कभी नही थकता। योग हमें भक्ति के मार्ग पर लेकर जाता है। इसलिए हमें भगवान से भोग के स्थान पर योग और भक्ति मांगनी चाहिए। कथा में मुख्य यजमान बालकिशन सोनी ने सपत्नीक व्यासपीठ की पूजा की। प्रसाद वितरण में व्यवसाई शेखर कुमरा का सहयोग रहा। शनिवार कथा का अंतिम दिवस रहेगा।

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