भास्कर न्यूज | अमृतसर जीएनडीयू में अब स्नातक स्तर पर पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के लिए “सिख धर्म की मूल जानकारी’ विषय का कोर्स अनिवार्य कर दिया गया है। यूनिवर्सिटी की अकादमिक काउंसिल की बैठक में यह फैसला लिया गया। यह कोर्स शैक्षणिक सत्र 2026-27 से यूजी (अंडर ग्रेजुएट) प्रोग्राम में लागू होगा। कोर्स गुरु नानक अध्ययन विभाग ने तैयार किया है और इसे यूनिवर्सिटी के विभिन्न विभागों में पढ़ाया जाएगा। पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से ओडीएल और ऑनलाइन स्टडी विभाग द्वारा कराई जाएगी। अकादमिक काउंसिल की बैठक की अध्यक्षता वाइस चांसलर डॉ. करमजीत सिंह ने की। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक और एआई के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए शिक्षकों और स्टूडेंट्स को नए तकनीकी कौशल के साथ खुद को तैयार करना होगा। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी का मुख्य उद्देश्य स्टूडेंट्स को रोजगार योग्य बनाना है। इसके लिए “रिमोट लर्निंग’ और “रिमोट एम्प्लॉयमेंट’ जैसे नए मॉडलों पर भी काम किया जा रहा है, ताकि छात्र वैश्विक अवसरों से जुड़ सकें। बैठक की शुरुआत डीन अकादमिक मामलों के डॉ. हरिंदर सिंह सैणी ने की, जबकि रजिस्ट्रार डॉ. केएस चहल ने बैठक का एजेंडा प्रस्तुत किया। बैठक में एक अन्य फैसले के तहत यूनिवर्सिटी परिसर स्थित सेंटर फॉर साउथ सेंट्रल एशिया स्टडीज का नाम बदलकर अब सेंटर फॉर सेंट्रल एशिया स्टडीज रखा जाएगा। इसके अलावा निर्णय लिया गया कि यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में पढ़ाए जाने वाले एनवायरनमेंटल स्टडीज, ड्रग एब्यूज प्रॉब्लम मैनेजमेंट एंड प्रिवेंशन, ह्यूमन राइट्स और ह्यूमन वैल्यूज एंड अंडरस्टैंडिंग हार्मनी जैसे कोर्सों को सत्र 2026-27 से ऑनलाइन मोड में लागू किया जाएगा। बैठक के दौरान वाइस चांसलर डॉ. करमजीत सिंह ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के साथ अकादमिक सहयोग के लिए समझौते (एमओयू) की प्रक्रिया शुरू की है। इसके तहत स्टूडेंट्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और साइबर सिक्योरिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मिलेगा। शुरुआती चरण में कंप्यूटर साइंस के करीब 60 स्टूडेंट्स का चयन किया जाएगा, जिनमें से 30 को ऑनलाइन इंटरएक्शन और संयुक्त अकादमिक कार्यक्रमों का मौका मिलेगा। अकादमिक काउंसिल की बैठक में विभिन्न फैकल्टी की ओर से 14 नए कोर्सों के प्रस्ताव भी पेश किए गए।


