भास्कर न्यूज | अमृतसर गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (जीएनडीयू) के गुरु ग्रंथ साहिब भवन में टिकाऊ कृषि, भोजन, स्वास्थ्य और एग्री-लॉजिस्टिक्स पर आधारित अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस की शुरुआत हुई। सम्मेलन में भारत और विदेशों से आए वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, डॉक्टरों और शिक्षाविदों ने कृषि, पोषण और स्वास्थ्य के भविष्य को लेकर गहन मंथन किया। उद्घाटन सत्र की शुरुआत अरदास और स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद सेंटर फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च एंड इनोवेशन की गतिविधियों और सम्मेलन के उद्देश्यों को प्रस्तुत किया गया। वाइस चांसलर प्रो. कर्मजीत सिंह ने टिकाऊ विकास, अंतर-विभागीय समन्वय और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य की चुनौतियों का समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। पहले दिन के सत्रों में यह बात सामने आई कि टिकाऊ खेती, पोषण विज्ञान, स्वास्थ्य नवाचार और न्यूट्रिशन के क्षेत्र में हो रही प्रगति से समाज को सीधा लाभ मिल सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि इससे खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी, बीमारियों की रोकथाम होगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। उद्घाटन समारोह के दौरान ‘पंजाब में जल संसाधन प्रबंधन: साझा जिम्मेदारी की ओर’ विषय पर आधारित वर्कशॉप प्रोसीडिंग्स जारी की गईं, जिन्हें डॉ. एसएस कुकल (एमजीएसआईपीए, चंडीगढ़) ने तैयार किया है। इसमें जल संरक्षण के लिए नीति-स्तरीय और सामूहिक प्रयासों की जरूरत पर बल दिया गया। सम्मेलन के दौरान दो महत्वपूर्ण समझौते किए गए, पहला एमओयू जापान की एआईएसटी संस्था और जीएनडीयू के बीच हुआ, जिसमें डॉ. सुनील कौल की मौजूदगी रही। इससे लाइफ साइंस, बायोटेक्नोलॉजी और न्यूट्रास्यूटिकल्स के क्षेत्र में भारत-जापान सहयोग मजबूत होगा। दूसरा एमओयू आईएपी ईएन और जीएनडीयू के बीच हुआ, जिसमें फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल से गुरजीत कौर शामिल रहीं। इससे पोषण और डायटीटिक्स के क्षेत्र में अकादमिक और क्लीनिकल सहयोग को गति मिलेगी।


