भास्कर न्यूज |लुधियाना पंजाब सरकार द्वारा वर्ष 2021-22 के जीएसटी ऑडिट केसों को व्यापारी के मूल स्थान से हटाकर अन्य शहरों में ट्रांसफर करने के निर्णय ने व्यापारियों में गहरा रोष भर दिया है। हजारों रुपए का आर्थिक नुकसान, समय की बर्बादी, मनोवैज्ञानिक तनाव सरकार की नीति से परेशान हो रहे है व्यापारी। इस अनचाहे ट्रांसफर के कारण व्यापारी को अपने प्रतिष्ठान को एक या 2 दिन के लिए बंद करना पड़ता है। इससे व्यापारिक गतिविधियां रुक जाती हैं और ग्राहक सेवा पर सीधा असर पड़ता है। कई व्यापारी ऐसे हैं जो अपने स्टाफ पर पूरी तरह निर्भर नहीं रह सकते। इस फैसले के खिलाफ व्यापार मंडल के अध्यक्ष हरकेश मित्तल ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने इसे व्यापारियों के खिलाफ सीधी धक्केशाही बताते हुए चेतावनी दी कि यदि यह आदेश तत्काल प्रभाव से रद्द नहीं किया गया, तो व्यापारी सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। ^जतिंदर पाल सिंह सलूजा कारोबारी ने कहा कि इस अनचाहे ट्रांसफर के कारण व्यापारी को अपने प्रतिष्ठान को एक या दो दिन के लिए बंद करना पड़ता है। इससे व्यापारिक गतिविधियां रुक जाती हैं और ग्राहक सेवा पर सीधा असर पड़ता है। कई व्यापारी ऐसे हैं जो अपने स्टाफ पर पूरी तरह निर्भर नहीं रह सकते। ^विकास मल्होत्रा ने बताया कि सरकार ने लुधियाना के व्यापारियों के ऑडिट केस अमृतसर, जालंधर और पटियाला जैसे शहरों में ट्रांसफर कर दिए हैं। अब व्यापारियों को अपने कामकाज को छोड़कर दूर शहरों में जाकर फाइलें निपटाने के लिए परेशान होना पड़ेगा। यह न सिर्फ समय और धन की बर्बादी है, बल्कि सरकार द्वारा जानबूझकर व्यापारी वर्ग को प्रताड़ित करने की नीति है। ^कारोबारी मोती नारंग ने बताया कि व्यापारियों के अनुसार, एक केस की सुनवाई के लिए दूसरे शहर जाना पड़ता है, तो इससे कम से कम 5,000 से 10,000 का यात्रा खर्च और 1-2 दिन का काम का नुकसान, कर्मचारी और परिवार से दूर रहने का असुविधाजनक अनुभव, दस्तावेज़ों की ढुलाई और बार-बार पेशी की स्थिति में कुल मिलाकर 25,000 से 30,000 तक का नुकसान होता है। ^आशीष भारती ने कहा कि एक तरफ सरकार व्यापारियों को राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानती है। वहीं, दूसरी तरफ ऐसे फैसले लेकर उनके खिलाफ काम कर रही है। सरकार के इन व्यापार विरोधी फैसलों के चलते बाहरी निवेशक पंजाब में उद्योग लगाने से कतरा रहे हैं। ^व्यापारी नेता राजेंद्र सिंह डिंपी ने सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यह ‘तानाशाही’ निर्देश तुरंत रद्द नहीं किया गया तो व्यापारी वर्ग सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन करेगा। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी आप सरकार की होगी। हरकेश मित्तल ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह व्यापारियों की बात सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों को परेशान करना, उनका समय और संसाधन नष्ट करना, कहीं से भी व्यापार हितैषी नीति नहीं है। इस तरह के फरमान से सरकार व्यापार का गला घोंट रही है।


