केंद्र सरकार द्वारा सितंबर 2025 में आम जनता को महंगाई से राहत देने के उद्देश्य से रोजमर्रा की जरूरत की सैकड़ों वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कटौती की गई थी। खाद्य पदार्थों, साबुन, डिटर्जेंट, बिस्किट और पैक्ड फूड जैसे उत्पादों पर टैक्स घटाए जाने के बाद शुरुआती महीनों में उपभोक्ताओं को इसका लाभ भी मिला। हालांकि, पांच महीने बाद अब कई कंपनियों ने धीरे-धीरे अपने उत्पादों के दाम फिर से बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। जीएसटी कटौती के बाद जिस बिस्किट की कीमत घटा कर 36 रुपए कर दी गई थी, उसकी कीमत अब फिर से बढ़ाकर 40 रुपए कर दी गई है। इसी तरह कुछ डिटर्जेंट पाउडर, बच्चों के पैक्ड फूड, बॉडी लोशन, क्रीम और साबुन के दामों में भी इजाफा किया गया है। चिंताजनक यह है कि कई उत्पादों में न तो जीएसटी कटौती का पूरा लाभ उपभोक्ताओं को मिला और न ही कंपनियों ने पैक का वजन बढ़ाया। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती लागत का हवाला देकर कीमतें बढ़ाना कंपनियों की रणनीति हो सकती है, लेकिन इससे आम आदमी पर महंगाई का दबाव फिर बढ़ेगा। लेबर कॉस्ट बढ़ने व पैकेजिंग महंगे होने से बढ़ रहे भाव: झारखंड कंज्यूमर प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय अखौरी ने कहा कि कई कंपनियां पुन: उत्पादों के दाम बढ़ाने लगी हैं। यह वृद्धि लेबर कॉस्ट बढ़ने और पैकेजिंग मटेरियल महंगा होने से हुई। ना कीमत घटाई, ना ही वजन बढ़ाया सितंबर में जीएसटी दरें कम किए जाने के बाद कई एफएमसीजी उत्पादों की ना कीमत कम की गई थी और ना ही वजन बढ़ाया गया था। कई छोटे बिस्कुट, मिक्चर, सॉस आदि के दाम आज भी जस के तस हैं। इनमें कई शैंपू, हेयर ऑयल और साबुन भी शामिल हैं। समझिए रिफाइंड तेल का गणित… वस्तुएं 5 माह पहले अब रिफाइंड तेल के पैकेट का वजन घटा ग्राहकों को ठगा, अब बढ़ रही कीमत तीन माह पहले कई रिफाइन तेल कंपनियों ने जीएसटी के आधार पर कीमतें घटाईं, लेकिन साथ में वजन भी कम कर दिया। अब उसी तेल की कीमत फिर से बढ़ने लगी है। तीन महीने पहले जो तेल 150 रुपए में एक लीटर (910 एमएल) आम उपभोक्ताओं को बेचा जा रहा था। अचानक इस तेल का वजन 750 एमएल कर दिया गया और यह 128 रुपए में बिकने लगा। अब इसी 750 एमएल वाले तेल की कीमत पुन: बढ़कर 136 रुपए तक हो गई है। यदि यही तेल एक लीटर (910) के पैक में हो तो गणित के अनुसार इसकी कीमत 165 रुपए हो जाएगी। यानी एक लीटर तेल की कीमत करीब 15 रुपए बढ़ गई है। सिर्फ पांच में माह में यह वृद्धि हुई है। दुकानदारों का कहना है कि कंपनियों ने वजन घटाकर ग्राहकों को धोखा दिया है। कीमतें नहीं घटी हैं, बल्कि बढ़ी हैं। खाद्य तेल के प्रमुख कारोबारी अर्जुन जालान ने कहा कि इस समय डॉलर मजबूत होने के कारण बहुतायत में ब्राजील और अर्जेंटीना से आने वाले सोयाबीन तेल की कीमत बढ़ी हुई है। वहीं, मलेशिया से आने वाला पाम ऑयल भी महंगा हो गया है। इसका भी कीमत पर असर पड़ा है।


