शहर भर में गणगौर का पर्व धूमधाम से मनाया गया। सुहागिन महिलाओं के साथ कुंवारी कन्याओं ने भी परंपरागत विधि रूप से गणगौर पूजन किया। श्री जीनगर समाज पंचायत सोसायटी की ओर से गणगौर की भव्य ऐतिहासिक शोभायात्रा जीनगर छात्रावास सुभाष नगर से शिव पार्वती के विवाह प्रसंग के रूप में निकाली गई। गणगौर के एक दिन पूर्व जीनगर समाज की महिलाओं द्वारा गणगौर माता का रात्रि जागरण किया गया। जीनगर समाज के अध्यक्ष भंवरलाल खींची ने बताया कि गणगौर का यह पर्व जीनगर समाज का ऐतिहासिक पर्व होता है। जिसमें महिलाएं 16 श्रंगार कर ईसर गणगौर को सर पर धारण कर नृत्य करती हुई शोभायात्रा में चलती है। कुछ वर्षों से नयापुरा की जगह जीनगर समाज के छात्रावास सुभाष नगर प्रथम से गणगौर की शोभायात्रा निकाली जा रही है। ईसर गणगौर की प्रतिमा एवं आसपास पांच पांच कलश लेकर 11 महिलाएं शोभा यात्रा में शामिल रहती है। शोभायात्रा के आगे केसरिया ध्वज लेकर घोड़े पर सवार होकर युवक सबसे आगे चले ,पीछे बैंड बाजे व महिला पुरुष शोभायात्रा में शामिल रहे,जिनका समाज बंधुवो द्वारा जगह-जगह पुष्प वर्षा से स्वागत किया। ईसर गणगौर उठाने के लिए लगती है बोली
जीनगर समाज की ये परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है जिसमें ईसर गणगौर, छोटी गणगौर धारण करने के लिए जीनगर समाज के सदस्य द्वारा बोली लगाई जाती है जो व्यक्ति सबसे ज्यादा बोली लगता है उसके परिवार की महिला को ईसर गणगौर धारण करवाई जाती है जो शुभ माना जाता है। जीनगर समाज के महासचिव थानमल डाबी ने बताया कि जीनगर समाज कोटा द्वारा गणगौर का महोत्सव 100 वर्ष से जीनगर समाज द्वारा मनाया जा रहा है। पूर्व में गोपाल निवास बाग नयापुरा से गणगौर शोभायात्रा लाडपुरा रामपुरा बाजार होते हुए घंटाघर जीनगर कटले में घूमर नृत्य शिव पार्वती के विवाह के रस्म पूरी कर संपन्न किया जाता था। अखिल भारतीय जांगिड़ ब्राह्मण महासभा महिला इकाई, कोटा के द्वारा भीतरिया कुंड प्रांगण में गणगौर उत्सव मनाया गया। इस कार्यक्रम में विशेष आकर्षक गणगौर क्वीन, सामूहिक घूमर नृत्य, हाऊजी और विभिन्न प्रकार के मनोरंजक गेम आयोजित किये गए। पोरवाल महिला मंडल ने मनाई गणगौर
श्रीनाथपुरम डी में पोरवाल महिला मंडल ने गणगौर पर्व को बेहद परंपरागत व हर्षोल्लास से मनाया। व्रत रखने वाली महिलाओ ने देवी गौरी और शिव जी का ध्यान करके व्रत का संकल्प को निभाया। मिट्टी से ईसर यानी शिवजी और पार्वती स्वरूप गौर की प्रतिमा बनाई और उसकी विधि विधान स्थापना की व गणगौर को सुंदर वस्त्र पहनाएं। रोली, मोली, मेहंदी, हल्दी, काजल से विधि विधान पूजा की और गणगौर के गीत भी गाएं। घर की दीवार पर या किसी पेपर पर सोलह-सोलह बिंदियां रोली, मेहंदी और काजल से लगाएं। पोरवाल महिला मंडल की भूमिका गुप्ता , श्वेता गुप्ता व हर्षा गुप्ता के अनुसार पूजा के समय गणगौर की कथा आपने घर के बड़े बुजुर्गों से सुनी । शाम को शुभ मुहूर्त में गणगौर को पानी पिलाने की परंपरा निभाई गयी। गणगौर की प्रतिमा का विसर्जन किया गया ।


