ग्वालियर का ऑक्सीजन हब कहे जाने वाले जीवाजी विश्वविद्यालय में हरे-भरे बड़े पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। शनिवार शाम यूनिवर्सिटी के डे-केयर सेंटर परिसर में पेड़ों की कटाई की गई। सूचना मिलने पर नगर निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे और कटाई रुकवाई। मौके से कटे हुए पेड़ों की लकड़ी भी जब्त की गई। कटे हुए पेड़ों में नीम और आम जैसे महत्वपूर्ण और काफी पुराने पेड़ शामिल हैं। हालांकि, नगर निगम का कहना है कि जितने पेड़ काटे गए हैं, उतनी लकड़ी अब तक बरामद नहीं हुई है। कई पुराने पेड़ काटे गए, जांच करेंगे
मौके पर मौजूद नगर निगम के पार्क नोडल अधिकारी मुकेश बंसल ने बताया कि उन्हें पेड़ों की कटाई की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचकर देखा गया कि कई पुराने पेड़ काटे जा चुके हैं। जब अनुमति के संबंध में जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि यह जांच की जाएगी कि नगर निगम से अनुमति ली गई थी या नहीं। यदि बिना अनुमति पेड़ काटे गए हैं तो वृक्ष संरक्षण अधिनियम के तहत संबंधितों पर कार्रवाई की जाएगी। छुट्टी का फायदा उठाकर कटवाए गए पेड़
शनिवार को जीवाजी विश्वविद्यालय में अवकाश रहता है। आरोप है कि इसी का फायदा उठाकर हरे-भरे पेड़ों की बेरहमी से कटाई कराई गई। कटे हुए पेड़ों में नीम और आम जैसे महत्वपूर्ण पेड़ शामिल हैं। प्रोफेसर बोले- भवन को नुकसान पहुंचा रहे थे
जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजेंद्र खटीक से पेड़ों की कटाई को लेकर सवाल किया गया। उन्होंने ताजा कटे पेड़ों को करीब 20 दिन पहले कटा हुआ बताया। उनका कहना था कि इसके लिए यूनिवर्सिटी से अनुमति ली गई थी और पेड़ एक भवन को नुकसान पहुंचा रहे थे, इसलिए कटवाए गए। वहीं, जनसंपर्क अधिकारी डॉ. विमलेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि जो भी पेड़ काटे या छांटे गए हैं, उनकी मंजूरी ली गई है या नहीं, इसकी जानकारी लेकर ही बता पाऊंगा।


